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महुआ मोइत्रा के विरुद्ध सीबीआई जांच शुरू : विपक्षी सांसदों का नैतिक पतन बना चिंता का सबब

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आखिरकार आज केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के विरुद्ध , संसद सत्र के दौरान अपनी लॉग इन आई डी गलत मंशा से साझा करने और पैसे अथवा प्रलोभन के प्रभाव में संसद में प्रश्न पूछे जाने के आरोपों पर अपनी जांच शुरू कर दी।  ज्ञात हो कि पिछले संसद सत्र में महुआ द्वारा पूछे गए प्रश्नों में अधिकाँश मशहूर उद्योगपति अडानी समूह के प्रतिद्वंदी व्यापारिक समूह के हितों को ध्यान रख कर पूछे गए प्रश्न थे।

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे की शिकायत पर , संसद की नैतिक समिति ने भ्र्ष्टाचार निरोधी लोकपाल की अनुशंसा पर महुआ के विरूद्ध कैश फॉर क्वेरी यानि पैसे या प्रलोभन लेकर संसद में गौतम अडानी समूह के प्रतिद्वंदी हीरानंदानी समूह के हितों से जुड़े सवाल पूछे जाने के मामले का राजफाश होने पर उक्त कार्रवाई को अंजाम दिया गया।  ज्ञात हो कि आरोप के साबित होने पर महुआ की संसद सदस्य्ता तो जाएगी ही उनका राजनैतिक करियर भी ख़त्म होने की बात कही जा रही है।

शुरूआती जांच से ये पता चला है और खुद महुआ ने अपने कई साक्षत्कारों में इस बात को माना भी है कि संसद सत्र के दौरान सांसदों को जारी किया जाने वाला गोपनीय वन टाइम पासवर्ड उन्होंने जाने अनजाने किन्हीं अन्य लोगों से भी साझा किया था और ये भी कि पूछे गए प्रश्नों में से भी बहुत सारे प्रश्न भी उन्हीं लोगों ने लिखे और तैयार किए थे।  किसी भी सांसद जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसे आचरण और व्यवहार की उम्मीद नहीं की सकती है।

ज्ञात हो कि लोकतंत्र के इस गिरते स्तर का ही ये परिणाम और प्रभाव है कि कभी शासन के लिए एक सचेत प्रहरी और आलोचक का काम करने वाला विपक्ष और विपक्ष के सांसद आज अपने कार्य और आचरण में इतना नीचे गिर गए हैं जो असल में न सिर्फ संसदीय गरिमा बल्कि खुद भारत के लोकतंत्र का अपमान है।

ये पहली घटना नहीं जब विपक्ष का कोई सांसद इस तरह के गैर जिम्मेदार और भ्रष्ट आचरण में लिप्त पाया गया है।  अभी हाल ही में आम आदमी पार्टी के सासंद ने भी संसद से निलंबन की सजा इसलिए पाई क्यूंकि उन्होंने अपने द्वारा प्रस्तावित किसी मसौदे पर सहमति दिखाए /दर्ज़ कराए सांसदों में से कई के फ़र्ज़ी हस्ताक्षर कर /दिखा कर उसे सम्मलित करने की कोशिश की थी।  उनका ये फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया और उन्हें निलंबन की सजा झेलनी पड़ी।

असल में ये सब विपक्ष के तमाम राजनैतिक दलों के नकारात्मक रवैये और सत्ता लोलुपता की भयंकर चाहत के कारण हो रहा है।  विपक्ष आज सत्ता पक्ष या सरकार द्वारा लाए जा रहे कानूनों , लागू की जा रही नीतियों , नियमों , योजना परियोजनाओं का आकलन विश्लेषण करके एक स्वस्थ आलोचना करने , बेहतर विकल्प देने या कुछ भी अलग सकारात्मक कहने करने से बिलकुल उलट सिर्फ प्रधानमन्त्री मोदी , उनके कथ्य , जीवन , दिन चर्या आदि पर ही सारा ध्यान दिए हुए है सिर्फ एक व्यक्ति की आलोचना , और अब तो अपमान करने में ही अपना सारा समय व ऊर्जा लगा रहा है , इसका दुष्परिणाम फिर यही होना है।

 

नहीं रुक पा रही पराली जलाने की घटनाएं : राजधानी फिर वायु प्रदूषण आपातकाल की ओर

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अभी कुछ वर्षों पूर्व भी एक समय ऐसे और इससे भी बुरे वायु पदूषण आपातकाल जैसे हालात हो  गए थे राजधानी दिल्ली में जब लोगों  घर दफ्तर तक में मास्क लगा कर सांस लेने पर विवश होना पढ़ा था और ये कोरोना महामारी से  पहले की बात थी।  हैरानी बिलकुल भी नहीं होती यदि आज दिल्ली के कूड़ों के पहाड़ , प्रदूषित यमुना से बाढ़ग्रस्त यमुना और हर साल शीत ऋतु में बायु प्रदूषण आपातकाल , इनमें से किसी भी , किसी भी एक समस्या के लिए भी कुछ प्रभावी , दूरदर्शी नहीं सोचा किया गया।

वायु प्रदूषण का बढ़ता बिगड़ता स्तर और संतुलन अब भी सिर्फ प्रकृति के भरोसे ही है जबकि इसके लिए दिख रहे , समझे जा रहे कुछ स्पष्ट कारणों में से एक पराली जलाने , और इसे आदतन , इरादतन जलाने वालों पर भी कोई रोक टोक नहीं डाली जा पा रही है। कुछ यही सारो सार था अभी माननीय न्यायपालिका के पास लगे एक संदर्भित वाद में।

अदालत ने न्यायालय में उपस्थित पंजाबा के प्रतिनिधि अधिकारियों द्वारा रखे गए स्पष्टीकरण को पर्याप्त न मानते हुए अगली पेशी पर ये बताने को कहा है कि पिछले दिनों पराली जलाते हुए पकडे जाने वालों पर क्या और कितनी , कैसी कार्रवाई की गई , जुर्माना सिर्फ लगा भर देकर खानापूर्ति की गई या लगाया  गया जुरमाना वसूला भी गया है।

ज्ञात हो कि कुछ वर्ष  पूर्व दिल्ली और पंजाब में दो अलग अलग राजनैतिक दलों की सरकार होने के कारण एक दूसरे पर  दोषारोपण का खेल चल जाता था किन्तु अब दोनों राज्यों में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के कारण पराली जलाने की घटनाओं में कमी आने का अनुमान लगाया गया था।  किन्तु हुआ इसका ठीक उलट।  इसका दुष्परिणाम भी तुरंत ही सामने आ गया और धुंए तथा गैस की काली चादर जो दिसंबर जनवरी तक शिकंजा फैलाती थी उसने सर्दियों की आहट से कहीं पहले ही स्थति नारकीय कर दी।

अभी हाल ही में पस्चिमी विक्षोभ से प्रभावित वर्षा ने कुछ समय के लिए प्रदूषण के इस आपातकाल से राहत जरूर दी लेकिन जल्दी ही स्थिति फिर जानलेवा हो गई है।  यहाँ यह उल्लेख करना  कि वायु गुणवत्ता के खराब होते स्तर से विवश होकर लाखों लोगों को घरों ,दफ्तरों , होटलों तक में वायुशोधक यंत्रों को लगाना पड़ा जाहिर है कि ये सभी उपाय भी स्थाई कर सौ प्रतिशत कारगर उपाय नहीं है।

जहां तक दिल्ली राज्य सरकार की बात है तो जब स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा मंत्री तक आर्थिक घपले घोटाले के आरोपों में गिरफ्तार हों , महीनों एक जनामन्त भी नहीं पा सके हैं ऐसे में वाय गुणवत्ता बेहतर करना तो दूर बदतर न हो इसके लिए जैसे गैर पराओगिक व निष्प्रभावी योजनाएं , रेड लाइट ऑन , गाडी ऑफ़ तथा ऑड ईवन सहित तमाम योजनाएं सिर्फ विज्ञापनबाजी बन कर रह गई।

प्रदूषण के विरूद्ध पारस्थितिकी तैयार करने में सबसे प्रभावी होते हैं वन क्षेत्र।  दिल्ली सरकार व सम्बंधित संशताओं ने इस दिशा में भी कोई प्रभावी कार्य नहीं किया।  प्रतिवर्ष पौधे लगाने का दिवस मना  तक सब वहीँ का वहीँ।  राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी , भूमिका के विमर्श से इतर समझने और आज अभी समझने वाली बात है कि फिर कैसे भारत अपनी राजधानी में विश्व के सभी देशों को बुला कर कह सकेगा कि आओ मिलकर दुनिया को हरित और स्वच्छ करते हैं।

आज राजधानी दिल्ली में ढाई करोड़ की विशाल जनसंख्या के लिए हवा पाई स्वास्थ्य जैसे बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित करना जितनी बड़ी चुनौती है यदि समय रहते इस पर गम्भीरता से काम नहीं शुरू किया गया तो सबसे बड़े अफ़सोस की बात ये होगी कि कभी अपने खेतों से हरा सोना उगाने वाले पंजाब प्रांत के कृषक समाज पर पराली जला कर शहरों की हवा में जहर घोलने का इल्ज़ाम भी हमेशा के लिए लग जाएगा।

गाँधी परिवार से वसूली शुरू : प्रवर्तन निदेशालय ने ज़ब्त किए 752 करोड़ मूल्य की संपत्ति

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गाँधी परिवार को देना होगा हिसाब किताब

मोदी सरकार जिन दो बातों के लिए पहले ही दिन से नो टोलेरेंस की नीति अपनाए हुए थी वो थी आतंकवाद के विरुद्ध खड़े होना और दूसरी भ्रष्टाचार के खात्मे का संकल्प।  प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा था कि ” देश और लोगों की संपत्ति में न तो खुद खाऊँगा और न ही किसी को खाने दूँगा।  उस वक्त शायद उन्होंने ये नहीं कहा था कि , अब तक जो खाया और अघाया घूम रहा हैं वो भी सारा निकाल लूंगा।

मोदी सरकार के आते ही और सबसे बढ़कर शासन की नीति और प्रशासन का रुख देख कर सालों से घोटाले कर रहे , फर्जी धन्ना सेठ लोग अपने ऊपर क़ानून का शिकंजा कसता देख कर निकल भागे और ऐसा भागे कि आज तक विदेश में भागे भागे छिपे छिपे फिर रहे हैं और सरकार ने उन देशों से भी मित्र नीति के तहत वहां उनका जीना मुहाल किया हुआ है।

इससे इतर राजनीति का चोला पहन कर , गरीबों के कल्याण और गरीबी हटाओ के नारों से दशकों तक देश  शासन करने वाले लोगों के घोटालों की जब फेहरिश्त खुली तो आज हालात ये हो गए कि , सब के सब , भ्रष्टाचार के हमाम में बिलकुल नंगे निकले।  आज सब के सब अदालतों से विभिन्न तरीकों और आधार पर जमानत लेकर अपनी खाल बचाने की जुगत में लगे हैं।

देश की राजनीति में कभी एक रसूख रखने वाला गाँधी परिवार भी , आर्थिक अनियमितताओं और उससे भी अधिक इरादतन किए गए आर्थिक अपराधों में संलिप्तता के आरोप से खुद को नहीं बचा सका।  बार बार लोगों द्वारा उठाया गया प्रश्न कि बिना किसी , कारोबार व्यापार के आखिर गांधी परिवार की आय और संपत्ति में इतने दिनों तक इतना बड़ा इज़ाफ़ा कैसे होता रहा के उत्तर में लोगों को गांधी परिवार द्वारा किए ,कराए जा रहे घोटालों के सच के रूप  में सामने आया ,

ऐसा ही एक घोटाला है नेशनल हेराल्ड घोटला। नेशनल हेराल्ड की स्थापना और संपादन जवाहरलाल नेहरू ने भारत के पहले प्रधान मंत्री बनने से पहले किया था। अखबार ने 2008 में अपना परिचालन निलंबित कर दिया था क्योंकि उस पर ₹90 करोड़ से अधिक का कर्ज था, जिसे कथित तौर पर चुकाया नहीं गया था,वर्ष 2015 में श्री सुभ्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक शिकायती वाद में ये आरोप लगाया गया कि गाँधी परिवार ने गैर कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये का लाभ कमाया।

अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लेकर मुकदमा चलाए जाने के विरुद्ध गांधी परिवार निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायलय तक पहुंचा लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए और गांधी परिवार को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए गांधी परिवार की दलील खारिज कर मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया।  यही कारण रहा कि राहुल सोनिया को जमानत याचिका दायर कर जमानत भी लेनी पड़ी तथा दोनों आरोपी अभी जमानत पर ही हैं।  

उधर प्रवर्तन निदेशालय ने लगातार  पूछताछ और जाँच के बाद कल गांधी परिवार की 752 करोड़ रूपए के मूल्य की संपत्ति ज़बात कर ली।  इस कार्रवाई को चुनाव से पहले सरकार द्वारा विपक्षी दलों पर दबाव बनाने जैसा ही घिसा पिटा राग बेशक कांग्रेस गा रही लेकिन लेकिन देश की जागरूक अवाम अब ये सारे खेल और दांव पेंच पहले ही देख चुकी है।

समय आ गया है कि देर सवेर , ऐसे तमाम राजनैतिक अपराधी जिन्होंने देश और सरकारी कोष की संपत्ति अपने और अपनी परवारों के नाम कर ली उन्हें न सिर्फ उनके अपराध के लिए दंड मिले बल्कि ऐसी तमाम संपत्ति जब्त कर दोबारा राजकोष में जमा कर दिया जाए।

कोरोना से लेकर प्रदूषण तक : बेबस और बेकाम दिल्ली सरकार

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कुछ वर्षों पूर्व जब पूरी दुनिया चीन द्वारा फैलाई गई महामारी कोरोना की चपेट में आकर पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था।  उन दिनों भी दुनिया और देश भर में कुछ लोग व् सरकारें ऐसी भी थीं जिनके गैर जिम्मेदाराना व्यवहार , व्यवस्था और नीतियों के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में चिकित्सीय व्यवस्था की स्थिति और अधिक नारकीय व दयनीय होकर रह गई थी।

इन्ही में से एक रही दिल्ली सरकार और उनके नुमाइंदे।  कोरोना तो चलिए खैर बीती बात हो गई अभी दो माह पूर्व ही एक बार फिर से दिल्ली सरकार , मुसीबत पड़ते ही भाग खड़ी हुई और आदतन सारा ठीकरा दूसरों पर फोड़ दिया।  ये अवसर था जब पंजाब हरियाणा से होता हुआ अथाह वर्षा जल राजधानी दिल्ली में एक सप्ताह तक बाढ़ की त्रासदी ले आया।  दिल्ली सरकार चुपचाप तमाशबीन होकर सब देखते रहने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकी।

उपरोक्त दोनों ही आपदाएं अचानक आईं थीं इसलिए हो सकता है की सरकार और मशीन री को इनसे निपटने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन शायद नहीं मिल सका हो , परन्तु इन दिनों राजधानी क्षेत्र की भयंकरतम दूषित हवा से निपटने के दावे तो पिछले पांच सात वर्षों से किए जा रहे हैं परन्तु इसका परिणाम और प्रभाव वही -ढाक के तीन पात।

प्रदूषण को नियंत्रित करके वातावरण स्वच्छ किये जाने का लक्ष्य तो दूर ,हालात तो दिनों दिन अधिक भयावह होते जा रहे हैं और ऐसे में एक बार फिर से दिल्ली सरकार अपने ढाई करोड़ नागरिकों को इस वायु प्रदूषण से राहत  देने के लिए सिर्फ यही कारगर ऊपर लाइ है कि पड़ोसी राज्यों तथा केंद्र की भाजपा सरकार पर सारा दोष मढ़ दिया जाए।

इत्तेफाक से पिछले कुछ वर्षों से पंजाब सरकार द्वारा स्थानीय किसानों को पराली जलाने से नियंत्रित नहीं कर पाने के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकारों को कोसने वाली आम आदमी पार्टी की ही अपनी सरकार पंजाब में भी बन जाने के बाद अब पंजाब पर दोषारोपण का खेल भी खटाई में पड़ गया है।

दीपावली के कुछ ही दिनों बाद जब महापर्व छठ पूजन के लिए सभी यमुना नदी और घाटों पर पहुँचेगे तो हर साल की तरह इस बार भी यमुना नहीं के भयानक प्रदूषण स्तर  की बात भी निकल फिर सामने आ जाएगी।  सरकार  पूरी तत्परता से केंद्रीय सरकार व् एजेंसियों पर सारा दोषारोपण करके इतिश्री कर लेगी।

असल में प्रदूषण सहित किसी भी बड़ी बुनियादी जरूरत और समस्या पर दिल्ली की राज्य सरकार ने कभी भी गम्भीरतापूर्वक कुछ नहीं किया यही वजह है कि अभी हाल ही में दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ़ जैसे अव्यवहारिक योजना को न्यायपालिका ने बिना जांचे परखे दोबारा लागू करने से रोक दिया।  देखा जाए तो सरकार का इसमें कोई दोष भी नहीं है क्यूंकि जैसे जैसे कारनामे/घोटाले को अंजाम देने में राज्य सरकार और उसके नुमाइंदे लगे रहे उसके बाद प्रदूषण जैसे छोटी मोटी समस्याओं के लिए समय ही कहाँ मिल पाता है।

बहरहाल , थोड़े दिनों में तेज़ हवाएं और बारिश शायद दिल्ली और आसपास के क्षेत्र पर छाए धुंए और धुल के गुबार को काम और ख़त्म तो कर देंगे किन्तु इस बीच जाने कितने ही नवजात शिशु, वृद्ध और रोगी , स्वच्छ हवा में सांस की कमी के कारण असमय ही काल कवलित हो चुके होंगे और जाने कितने और इस कतार में शामिल हो जायेंगे।

यह बहुत दुखद स्थिति है कि , अपनी समस्याओं के समाधान खोजने और निपटने के लिए ही समाज अपने लिए सरकारोंब का गठन करती है , बड़े विशवास के साथ अपने मत देकर अपना प्रतिनिधि बना कर जिन्हें चुनती है वे सालों साल सरकार  में बने रहते हैं और उधर दूसरी तरह ये समस्याएं भी सालों साल यूँ ही बनी रहती हैं।

खालिस्तान समर्थक कनाडाई सिक्खों ने तिरंगे को पैरों तले रौंदा

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बहुल लम्बे समय से भारत के खिलाफ अपने मन में जहर भरे हुए कुछ खालिस्तानी सिक्खों ने , पहले भारत कनाडा के संबंधों का लाभ उठाते हुए वहां अपनी पहचान , अपना नाम रसूख और पैसा बनाया और फिर जब पूरी दुनिया में एक बार फिर से भारत अपने विकास और वैश्विक कद में आज सबसे ऊपर है तो आज कनाडा में बसे इन खालिस्तानियों ने कृतघ्नता की सारी हदें पार कर दीं।

खालिस्तानियों ने पहले अपने एक प्रदर्शन के दौरान , भारतीय तिरंगे को फुटबॉल पर लपेटा बल्कि उसे बार बार अपने पैरों तले रौंद रौंद कर खेलते रहे और भारत के खिलाफ नारे लगाते रहे और बेशर्मी से वीडियो बनाते रहे , ट्विट्टर पर बहुत सारे लोगों ने कनाडा के प्रधानमन्त्री ट्रुडो लानत मलामत की है , ट्रुडो को इससे पहले चीन के राष्ट्रपति ने भी सार्वजनिक रूप से लताड़ लगाईं थी और अभी हाल ही में जी 20 सम्मलेन में भाग लेने आए ट्रुडो पूरा समय नशे में पाए गए थे

हालात इतने बुरे हो गए हैं कि एक विशेष क्षेत्र में खालिस्तानियों ने कब्जा करके उस क्षेत्र को खालिस्तान घोषित कर दिया है और वहां खालिस्तानियों ने कई बार अन्य भारतीयों को वहां से निकल जाने की धमकी भी खुलेआम दी जिस पर कनाडा ने प्रशासनिक तौर पर भी चुप्पी साधे रखी है।

भारत के के बाद श्रीलंका ने भी कनाडा को आतंकियों का पनाहगाह बनने की राह पर जाता देश बता कर खेद और चिंता जताई है।

जेल से पेरोल पर रिहा लालू देख रहे लौंडा नाच : वीडियो हुई वायरल

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बताओ भला , ये भी कोई बात हुई , अरे चलिए बात हुई तो हुई , ये भला कोई खबर हुई की जेल से पेरोल पर रिहा हुए बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान उप मुख्यमंत्री के पूजनीय पिताश्री श्री लालू यादव जी , खराब स्वास्थ्य के आधार पर इन दिनों , अदालत द्वारा चारा घोटाले में दोषी ठहराए जाने के बाद सुनाई जाने वाली सजा काटने के लिए जेल में थे , इसी बीच उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई हुई तो वे पेरोल (एक तरह की सशर्त सकारण जमानत ) पर रिहा होकर स्वास्थ्यलाभ के लिए अपने घर पटना आ गए।

अब यहाँ किसी समारोह में , समारोह में गांधी अंबेडकर आदि वंदनीय लोगों की तस्वीर लगे होने से अनुमान है कि कोई राजनैतिक, सामाजिक कार्यक्रम ही रहा होगा , कार्यक्रम में क्या कुछ हुआ ये तो पता नहीं लेकिन जो एक वीडियो बहुत तेज़ी से ट्विटर तथा अन्य सोशल नेट्वर्किंग साइट्स पर तेज़ी से वायरल होकर देखी जा रही है , इसमें स्टेज पर कुछ लड़के ,नर्तकियों सा स्वांग और वेशभूषा बना कर जम कर थिरक रहे हैं (इसे बिहार में लौंडा नाच कहा जाता है ) वीडियो में देखा जा सकता है कि लालू यादव और उनके बड़े सुपुत्र श्री तेज प्रताप यादव अपनी चिर परिचित हरी टोपी में , समारोह की सबसे अग्रिम पंक्ति में बैठ कर नाच का रसास्वादन कर रहे हैं।

अजी पूछिए ही मत , लोगों ने इतना बवाल काट दिया कि बस ,

क्या बाबा , अइसे करियेगा , मने उधर पूरा देश दुनिया महिला आरक्षण क़ानून बना दिया और मना के पूरा जश्न मना दिया और इधर आप स्टेज पर , ई थुथराहा लड़का सबको , जबरदस्ती लहंगा चुन्नी पहना के कुदवा रहे हैं , अरे गान्ही बाबा के फोटो पीछे कर देना था कि नहीं ,बाबा कोई बात नहीं कभी कभी बेटर स्वास्थ्य के लिए नृत्य उर्त्य को इंज्वा भी नहीं कर सकते क्या , लेकिन भीड़ीयो नहीं न बनाना थी जी , अजी हाँ

G 20 के जवाब में चीन की G 2 की बैठक : ग्रुप को पाकिस्तान lead (लीद)करेगा

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भारत में जी 20 के सफल आयोजन से जल भुन और फुंक कर चीन  ने आनन् फानन में जी 2 की बैठक बुलाने का विचार किया है।  जी 2 में विश्व के दो बड़े देश चीन और रूस शामिल होंगे।  पाकिस्तान को भी बैठक में शिरकत करने के लिए बुलाया गया है।  अंदरूनी खबर ये है कि पाकिस्तान को भरपेट बिरयानी खिलाने का लालच देकर , बैठक के इंतज़ाम पानी आदि के लिए बुला लिया है।

बैठक के मुद्दे पर कोई सहमति न बनी तो दोनों देश मिलकर पाकिस्तान को गरियायेंगे क्योंकि यही एक अकेला देश है जिसको गरियाने और लतियाने पर , दुनिया के किसी भी देश को दुःख या मलाल नहीं होता कई बार तो खुद पाकिस्तान को भी महसूस नहीं होता , आखिर सालों से आदत पड़ी हुई है।

वैसे सुनने में तो ये भी आया है कि पाकिस्तान को जी 2 देशों ने ये दिलासा दिया है कि – आपने गबराना नई ए , ग्रुप को lead (लीद ) तो पाकिस्तान ही करेगा।  वल्लाह ये तो तौबा तौबा का मकाम हो गया जी

सनातन शाश्वत सत्य है : था , है और हमेशा रहेगा

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हिन्दू , हिंदुत्व , सनातन को कोसना , गाली देना , अपमानित करना और अब कुक ह ओछे राजनेताओं द्वारा सनातन को असाध्य रोग सामान बताया जाना ये सब कुछ न पहली बार हुआ कर किया जा रहा है और न ही ये आख्रिरी बार होगा।  इससे पहले भी इस तरह की कई कुत्सित और एजेण्डेवादी प्रयास होते रहे हैं और सनातन और हिन्दू इष्टों तक को अपमानित लांछित किए जाने की कई घटनांए होती रही हैं।

सनातन को ख़त्म करने का ताज़ा ताज़ा ख्याली ख़्वाब देखने वाले इतिहास के सारे सबक भूल गए तभी ये नहीं समझ पाए की हज़ारों सालों से सैकड़ों  , आताताईयों, आक्रांताओं , जिनका उद्देश्य भी एकमात्र यही था सनातन को ख़त्म करना और अपनी इस कोशिश में ये सभी समय की गर्त में चले गए और चिर शाश्वत सत्य सनातन हमेशा ही अक्षुण्ण बना रहा।

असल में सनातन पर प्रश्न खड़ा करने वाले सनातन की परम्पराओं मान्यताओं पर संदेह वाद विवाद उत्पन्न करने वालों का ज्ञान सनातन के विषय में बिलकुल शून्य है तभी वो ऐसे बचकाने बातें करके अपना मन बहलाते हैं।  सनातन को ख़त्म करने की बात कहने करने वालों को ये भी बताना चाहिए कि आखिर वे ऐसा क्या करेंगे कि सनातन सिरे से ही जड़ से ही ख़त्म हो जाएगा।

सनातन के लिए सृष्टि ही ईश्वर है और प्रकृति प्रदत्त सब कुछ आदरणीय , पूजनीय है।  सूर्य , चाँद , धरती , पहाड़ , जंगल ,  नदियां ,पशु पक्षी , पेड़ सब कुछ पूरा ब्रह्माण्ड के कण कण में जो भी मूर्त अमूर्त यहाँ तक की सजीव निर्जीव जो भी पूरी मानव जाती के कल्याणार्थ और प्राकृत है वो सम्पूर्ण सनातन है।  शिक्षा , संस्कार और यहाँ तक की व्यवहार में भी सनातन है।  

और कोई क्यों चाहता है सनातन का नाश , सनातन का उन्मूलन और क्या क्या ख़त्म करोगे भाई , सूर्य , चाँद ,धरती , पहाड़ नदी , तो इन सबको पूजते रहते हैं तो जब तक इस ब्रह्माण्ड में धरती है और रहेगी तब तक इस धरती को माँ कहने वाले सनातनी भी रहेंगे।  जब तक इस धरा पर गंगा और हिमालय हैं तब तक सनातन शाश्वत था और रहेगा बाकी दुनिया तो आनी जानी है

कांग्रेस : तुम्हारा दुःख खतम काहे नहीं होता बे

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जबसे कांग्रेस के हाथ से सत्ता ,सरकार गई है तभी से , भाई साहब तभी से , भाई साहब तभी से इस पार्टी का ढोल ढपली सब फट गया है।  सरकार बची नहीं , मंत्रालय मिला नहीं , खाली खलिहर होकर एकदम दलिद्दर हो कर रह गए हैं बेचारे।

अब आप खुद देखिये , जब भारत।,  दुनिया को अपने दम पर चाँद पर पहुंच कर हुंकार भर रहा होता है ये पार्टी और इनके चश्मों चराग निकल पड़ते हैं पैदल भारत घूमने और उससे थके तो सीधा विदेश , और भारत भी किसलिए घूमे , भारत को जोड़ने के लिए , कहाँ जोड़ना , किसके साथ किसे जोड़ना है कब जोड़ना , इसका कुछ अता पता ही नहीं बाकी सब ब्ला ब्ला ब्ला।

इतने सालों में संसद से लेकर सड़क तक और पोल से लेकर पार्टी तक कहीं भी कभी भी , प्रभावशाली , तार्किक , दूरदर्शी या जुझारू दीखते लगते तो भी कहा माना जा सकता था की सत्ता में पचास साल तक बैठी पार्टी विपक्ष में उठने बैठने के सामान्य संस्कार से तो परिचित होगी ही।

अभी जब पूरी दुनिया भारत की अगुआई में मेजबानी में भविष्य के विश्व और विश्व के भविष्य पर निर्णायक मंथन के लिए एकत्र है तो उन्हें , अपने कांग्रेस को तकलीफ ये है की – मेहमानों को रास्ते में पड़ने वाली झुग्गी झोपड़ियों या उस बहाने दिल्ली दिल्ली देश की तथाकथित गरीबी गन्दगी बदहाली क्यों नहीं देखने दी ,-मतलब कुछ भी। अपना पिछवाड़ा उठा कर बवासीर दिखा कर मेहमान से दवाई पूछने का काम कांग्रेस को करता देख तभी कोई पूछ बैठा

अबे कांग्रेस ! तुम्हारा दुःख ख़तम काहे नहीं होता बे 

 

मेरी वाली दिल्ली : इक दिल्ली भीगी भागी सी

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दिन समय साल
आज अभी दिल्ली

इक दिल्ली भीगी भागी सी ,
जी 20 की रातों में जागी सी

पूरी रात बरसी है दिल्ली ,मद्धम मद्धम लय ताल में और ऊपर छाए काले बादलों से लगातार अमृत बूंदें बरस रही हैं , अच्छा है इस बहाने दिल्ली की धुलाई नहाई हो जाती है

ऐसे मौसम में यदि दिन रविवार का हो तो फिर सड़कों पर आज कोई नहीं दिख रहा , न सामान बेचने वाले न खरीदने वाले , आवाजाही बहुत कम है अभी अलबत्ता तारों पर कबूतरों की बैठक और नीचे गीली गीली ब्लैक होली काऊ, ये सब मौजूद और मुस्तैद मिले

आज दिन भर बादल बारिश के बीच ही रहेगा मामला थोड़ा कम या ज्यादा , चार दिन की छुट्टियों में बाहर निकले लोग आज वापसी की तैयारी में लगेंगे और शाम रात तक घर पर वापसी