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केरल और पश्चिम बंगाल :तैयार होते दो इस्लामिक राज्य

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किसी ने बहुत पहले ही कहा था कि ,’

देश को नहीं है ख़तरा उतना ,विदेशी हथियारों से
देश को है असली खतरा तो देश के ही गद्दारों से

और यही इस देश की सबसे बड़ी विडम्बना है , सबसे बड़ी त्रासदी और सबसे बड़ी बीमारी है जिसे पाल पोस कर अब ऐसे नासूर का रूप दे दिया गया है ,जिससे रिस रिस कर बाहर निकल रह मवाद पूरे देश और समाज को विषाक्त कर रहा है |

और हो भी क्यों न , जब इस देश के तथाकथित रहनुमाओं ने अपने स्वार्थ , सत्ता के लालच और मौकापरस्ती में देश के स्वतन्त्र होने के समय से ही जानबूझ कर ज़हर के पेड़ को बोया और बाद में उनकी संतानें ,जिन्होंने इस देश को अपनी बपौती समझ कर पूरी ज़िंदगी उसका रक्त चूसा , उसे सींच सींच कर उस विषबेल को पूरे देश और समाज में फैलाया ताकि इसकी आड़ में उनकी सियासत की दूकान और ये नीच धंधा चलता रहे |

कभी देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने  , मिजोरम विधानसभा के कांग्रेस के घोषणा पत्र में ये वचन दिया था कि जीतने पर मिजोरम की सरकार सीधा ईशाई मिशनरियों और चर्च द्वारा ही संचालित की जाएगी | आज फिर कुछ सालों के बाद देश के दो राज्य धीरे धीरे मगर खुल्लम खुल्ला इस्लामिक राज्य बनने की राह पर हैं | पूरा देश , देश की जनता , सरकार ,न्यायालय सब मौन और मूक होकर आराम से देश को विखंडित होता हुआ देख रहे हैं |
इनमें पहला है पश्चिम बंगाल और दूसरा है केरल | इन दोनों राज्यों में जिस तरह एक सोची समझी साजिश के तहत सरकारी सरपरस्ती में कट्टर इस्लामिक शरीया कानूनों और उनकी रवायतों को न सिर्फ बढ़ाया जा रहा है बल्कि देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज , हिन्दू धर्म स्थलों , हिन्दू राजनीतिक दलों , व्यक्तियों , समूहों सबको , हिंसा और दमन के जोर पर दबाया कुचला मारा खत्म किया जा रहा है |

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , को “जय श्री राम ” बोलने भर से इतनी ज्यादा तकलीफ होती है कि आज बंगाल में हिन्दुस्तान के आराध्य प्रभु श्री राम का नाम लेना सबसे बड़ा अपराध हो गया है | ममता बनर्जी के लगातार हिन्दू विरोधी बयानों ,फैसलों के कारण उन्हें लोग ममता बानो कह कर पुकारने लगे हैं | पश्चिम बंगाल में ,कांग्रेस से अलग होकर (मगर असल में कांग्रेस वाले सारे कुकर्मों को लिए हुए ) बनी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के तमाम मुस्लिम और कट्टर इस्लामिक पंथी समर्थक , पूरे राज्य में हिन्दुओं के साथ मार पीट , ह्त्या , लूट ,बलात्कार और दंगे करके आतंक फैलाये हुए हैं |

स्थिति कितनी ज्यादा भयानक है इस बात का अंदाज़ा सिर्फ इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान सरकार के समय में अब तक 4000 से अधिक हिन्दू परिवारों का खात्मा किया जा चुका है , जिनमें से 200 से अधिक तो सामाजिक और राजनैतिक पदों पर काम कर रहे कार्यकर्ता /पदाधिकारी थे |

पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी आज देश के उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में शामिल है जहां खुलेआम राष्ट्रविरोधी और विचारों और गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है | जो सरकार कभी , जय श्री राम का विरोध करती है तो कभी दुर्गा पूजा के पंडालों का और कभी माँ दुर्गा की मूर्ति विसर्जन में बंदिशें लगाती है उसके शासन में यही सब होना अपेक्षित है | अब हाल ही में चर्चित और नारकोटिक्स विभाग द्वारा ड्रग्स के धंधे में लिप्त अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के विरूद्ध वहां बाकायदा रैली निकाली जा रही है |

इससे दो कदम और आगे बढ़ते हुए दक्षिण का मुस्लिम प्रभावित राज्य केरल में तो सरेआम ये कहा जा रहा है , लोगों को उकसाया ,बताया ,भड़काया जा रहा है कि , किस तरह कैसे , अगले कुछ वर्षों में केरल को पूरी तरह से इस्लामिक राज्य बना लिया जाएगा | पड़ोस में तेलंगाना में भी इसकी देखा देखी , कट्टर इस्लामिक शरीया अदालतों को न्यायिक संस्थान के जैसे अधिकारों के लिए सरकार के साथ विचार विमर्श चल रहा है |
सडकों पर गाय काट कर खाने ,  हिन्दू मंदिरों , गर्भगृहों को तोड़ कर नष्ट करने , साधु पुजारियों की ह्त्या करने , हिन्दू धर्म स्थानों की संपत्ति लूटने , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों का क़त्ल करने , जैसे अपराधों को बार बार करके पूरे देश को ये धमकी /सन्देश दिया जा रहा है कि ,भविष्य में वे क्या और कैसे करने वाले हैं ?
विश्व में हिन्दू बहुसंख्या वाला इकलौता देश जिसके धूर्त राजनेताओं ने दशकों तक अपनी सत्ता और सियासत के लिए , देश को एक छद्द्म धर्मनिरपेक्ष के आवरण में कैद करके , अपने वोटों के लिए मुस्लिम तुष्टिकरण का वो घिनौना खेल खेला जो आज सत्तर वर्षों के बाद देश को फिर उसी मोड़ पर ले आया है जहां से कभी बंटवारे और अलग्वावाद की शुरुआत हुई थी |
यूँ तो आज , दिल्ली से लेकर मुंबई तक और बंगाल से लेकर केरल तक कोई भी राज्य ,कोई भी प्रदेश, क्षेत्र इस इस्लामिक विस्तारवाद और हिंसा की चपेट में आने से अछूता नहीं है , लेकिन इनमें से भी कुछ वो स्थान जहां मुस्लिम बाहुल्य जनता और राजनीति का वर्चस्व है वो सब के सब , प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से देश के भीतर रह कर भी आज ,भारत को तोड़ने बर्बाद करने के लिए , शत्रु देश पाकिस्तान और चीन से भी कहीं अधिक खतरनाक मंसूबों को पाले और अंजाम दे रहे हैं |
हिन्दू समाज , सरकार , संस्थाओं , प्रशासन सभी को ये समझ लेना चाहिए कि आज जब देश के बाहर के दुश्मन ,इस फिराक और साजिश में लगे हैं कि , धीरे धीरे विश्व में अपनी ताकत और पहचान बनाता हुआ भारत किसी तरह से से विकास के रास्ते से भटक जाए तो ऐसे में ये बहुत जरूरी हो जाता है कि , देश के अंदर पनप रहे ऐसे गद्दार सोच वाले तमाम व्यक्तियों , दलों , विचारों को पूरी सख्ती और निर्दयता  से ख़त्म कर दिया जाए |
याद रहे , जो अभी नहीं , तो फिर कभी नहीं

हिंदी हैं हम -हिंदी ,हिन्दू ,हिन्दुस्तानी

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अंग्रेजीमय दिल्ली की अदालत में ,यूँ तो मैं अपने काम , जुनून और सबसे अधिक अपने बेबाक तेवर कारण (ठेठ बिहारी , सबपे भारी ) ,किसी लंठ लठैत दबंग सरीखा हूँ , मगर जब बात कार्यालय में आधिकारिक रूप से राजभाषा हिंदी में काम करने की होती है तो फिर दिल्ली की 11 जिला अदालत  में , अपने हिंदी प्रेम और बस छटांक भर ज्ञान के कारण अपराजित , असीमित और अपने नाम के अनुरूप अजेय हो जाता हूँ |

दो दशकों से अधिक के अपने सेवा अनुभव में मैंने हिंदी के साथ , हिंदी में काम करते हुए , बहुत सारे उतार चढ़ाव देखे , जिला अदालत द्वारा हिंदी में लिखे और सुनाए गए पहले और अब तक के एकमात्र आदेश को तैयार करने से लेकर दिल्ली सरकार द्वारा हिंदी भाषा को प्रोत्साहन देने हेतु आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सहित अनेकों पुरस्कार प्राप्त करने , विशेष मौकों पर अदालत  परिसर में आयोजित किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मंच पर प्रस्तुति देने , जैसे अनेक और बहुत ही यादगार अनुभव को सहेजता रहा हूँ | 

   

मगर इन सबके बावजूद मुझे और लगभग सबको पता है कि ,सरकारी दफ्तरों ,नीतियों ,नियमों सहित अदालतों में भी हिंदी को सिरमौर बनाने के लिए ,मेरे जैसे बहुत और बहुत से ज्यादा अजय चाहिए जो आने वाले समय के लिए हिंदी को इतना अजेय कर दें कि हम सच में कल को कह सकें , और हाँ सिर्फ एक दिन नहीं रोज़ कह सकें | हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान | और हाँ मैं और मुझ जैसे करोड़ों हिन्दुस्तानी तो रोज़ ही , हर पल ,हर क्षण , जो सोचते भी हिंदी में ही हैं , हिंदी दिवस मना रहे होते हैं | और यकीन मानिए , हर समय हमारी हिंदी जय विजय मनाती है | हम ख़ुद को कभी हारने नहीं देते , और देंगे भी नहीं क्यूंकि ” हिंदी हैं हम ” |

चुलबुल विलेन छेदी सिंह हीरो : सोनू सूद असली दबंग

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जैसा कि पहले से जग जाहिर था और लोगों को भी अब धीरे धीरे खूब समझ आ चुका है हिंदी सिनेमा में पूरे षड्यंत्र के साथ किस तरह कुछ लोगों द्वारा इस्लामिक एजेंडे को बढाया जा रहा है | हिंदी सिनेमा को नशा ,अय्याशी , भाई भतीजावाद , और तमाम तरह की गैंगबाजी का अड्डा यानि बॉलीवुड | और बिलकुल किसी बड़े अपराध माफिया की लीक पर चलता ये सिनेमा जगत भी एकदम सिनेमा माफिया बनता चला गया |

एक तरफ जहां हिन्दू कलाकारों से लेकर ,कथानकों, किरदारों से लेकर संवाद और चरित्र तक में किसी न किसी तरह से हिन्दुओं को कमतर करने की लगातार कोशिश वहीँ दूसरी तरफ मुस्लिम अभिनेताओं के पीछे अपराध माफिया के अंधाधुंध समर्थन से उन्हें डॉन, सुलतान , भाई जान जैसा चरित्र गढ़ने की कोशिस | ये वही कोशिश है जो एक बेहद घृणित और गुस्सैल घमंडी अभिनेता को कभी निरीह जानवर का शिकार करना तो कभी शराब पीकर अपनी गाड़ी के नीचे कई मासूमों की ह्त्या करने वाला व्यक्ति को , जबरन हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा नाम साबित करने की होती है |

इसी कोशिश के तहत ही , आमिर खान जैसा तुर्की पसंद (तुर्की इसलिए क्यूंकि आज विश्व में इस्लामिक कट्टरपंथ का नया मुल्ला झंडाबरदार बनकर उभरा है ) अभिनेता पूरी चालाकी और मक्कारी से देश भर के सामने टी वी शो कर सारी समस्याओं की बात करता है , विमर्श करता है मगर जानबूझ कर मुस्लिम समाज में व्याप्त मज़हबी कट्टरता और अन्य गंभीर कुरीतियों , अन्ध्विश्वाशों पर एक शब्द भी न बोलकर अपनी असलियत जगजाहिर कर देता है | एक ऐसे देश में जहां के बहुसंख्यकों के ईष्ट और आस्थाओं का अपमान करके करोड़ों अरबों रूपए कमाने के बावजूद यह कहता है कि एक अल्पसंख्यक मुस्लिम होने के कारण डर के मारे देश छोड़ने का विचार आता है ? सच में क्या ?

इसे संयोग माना जाए या ये एक हकीकत है कि जब भी देश ,समाज , सेना , सरकार को अपने कथ्य , वचन और अर्थ से संबलता प्रदान देने की बारी आती है तब , ये “करोड़पति अरबपति खान” एकदम विलुप्तप्राय प्राणी हो जाते हैं | देश समाज के सहायता के लिए कुछ करना देना तो दूर इनके मुंह से कभी भूल कर भी देश हित में , किसी की मदद के लिए कुछ नहीं निकलता | ऐसे समय और ऐसे मौकों पर हमेशा सबको अक्षय कुमार और नाना पाटेकर , और सोनू निगम जैसे अभिनेताओं का नाम और काम ही नज़र आता है | यहाँ एक बात और भी गौर करने वाली है कि ये करोडपति खान , स्मगलर डॉन को हीरो दिखाते हुए रईस जैसी फिल्मे बनाते हैं जबकि अक्षय कुमार राष्ट्र और राष्ट्रियता से जुड़ी फिल्मों करते दिखते हैं | यही सच है और यही फर्क भी |

अंत में ,यदि सिर्फ कुछ शब्दों में समझना है तो इसे ऐसे समझा जाए कि . चुलबुल पांडे जैसा दबंग पुलिसवाला बनकर समाज के लिए बेख़ौफ़ काम करने जैसा किरदार निभा कर चांदी कूटने वाले सालमान खान देश और समाज के मदद के लिए ऐसे कोरोना काल में और ऐसी महामारी से निपटने के लिए टेलीविजन पर “बिग बॉस” लेकर आ रहे हैं जबकि उनकी सिनेमा  में खलनायक की तरह दिखाए जाने वाले छेदी सिंह , अभिनेता सोनू सूद आज जिस तरह से समाज में लोगों की सहायता के लिए अपने अकेले के दम पर जितनी जो मदद लगातार करते चले आ रहे हैं उससे यही साबित होता है कि ,असली दबंग सोनू सूद और असली छेदी सिंह सलमान खान ही है |

तीन से ज्यादा बच्चे तो सीधा जेल : जनसंख्या नियंत्रण कानून

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बार बार पूरे विश्व की बहुत सारी संस्थाएं और समूह इस बात को उठाते रहे हैं कि यदि दुनिया की आबादी इसी तरह बेहिसाब बढ़ती रही तो इस शताब्दी के उतरार्ध में ही इस दुनिया पर अपने अस्तित्व का संकट आ जाएगा | जिस प्रकार रात दिन विश्व की जनसंख्या आसुरी रूप से बढ़ती जा रही है उसने पहले से ही अविकसित और पिछड़े हुए देशों की कमर तोड़ कर रख दी है | और विश्व में जब जब बढ़ती हुई जनसंख्या को एक समस्या की तरह देख कर उसका आकलन और विश्लेषण किया जाता है तो भारत अपने बेशुमार जनसंख्या के कारण वैश्विक समुदाय के सामने अपराधी की तरह प्रस्तुत किया जाता है | जो बेशक एक भारतीय के रूप में सुनने में बुरा लगे मगर कटु सत्य तो यही है |

ये भी गौर करने वाली बात है कि भारत का पड़ोसी राष्ट्र चीन , भारत से भी अधिक जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद उसने एक तो अपनी अथाह मानव शक्ति को नियोजित करके मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया है दूसरे ,जनसंख्या नियंत्रण कानून और व्यवस्थाओं को इतनी अधिक कड़ाई से पालन किया और करवाया की एक समय चीन की जनसंख्या दर ऋणात्मक हो गई थी |  चीन की कठोर नीति का उदाहरण इसी बात से लग जाता है कि एक समय वहाँ तय नियमों से अधिक संतानोत्पत्ति की सज़ा अधिकतम यानि मौत की सज़ा दी जाती थी |

पिछले कुछ समय से भारत में भी बढती सारी समस्याओं और मूलभूत जरूरतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सबसे बड़ी बाधा ,देश की विराट जनसंख्या है | एक विकासशील देश पिछले 70 वर्षों के अथक और अनेक प्रयास के बावजूद भी यही आज ,भोजन , वस्त्र , निवास , चिकित्सा ,शिक्षा आदि जैसी तमाम जरूरतों के लिए भी मोहताज है ,उसके अभाव में जी रहा है तो उसके लिए एक सबसे अहम् कारण देश के बेतहाशा लोग हैं | सरकार द्वारा भी इस दिशा में एक ठोस जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की चर्चा के बीच ही ,माननीय सर्वोच्च न्यायालय में इसी आशय को लेकर न्यायालय द्वारा सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के उपाय पर निर्देश जारी करने हेतु संस्थापित याचिका के उत्तर में सरकार जल्द ही प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून का मसौदा पेश करने वाली है |

सूत्रों की माने तो , सरकार द्वारा प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून में दो से अधिक बच्चे वाले अभिभावक /माता पिता , देश शासन सरकार व विधि द्वारा प्राप्त बहुत से अधिकारों को स्वतः खो देने के कारण स्वाभाविक रूप से बिना कुछ किए ही दोयम दर्जे के नागरिक हो जायेंगे | तीसरी संतान के माता पिता , सरकारी नौकरी , अनुदान ,वजीफा , सहायता , और यहाँ तक कि अपने मताधिकार से भी वंचित किए जा सकेंगे | जबकि तीन से अधिक और चूहों ,श्वानों और शूकरों की तरह दर्जन दर्जन भर बच्चे पैदा करने वालों पर आपराधिक कार्यवाही करके उन्हें दस साल तक की कैद का प्रावधान किया जा रहा है |

साधारणतया , जनसंख्या नियंत्रण के लिए विश्व भर मौजूद कानूनों को देखते हुए ये कानून सामयिक और समीचीन ही लग रहे हैं और दूसरे देशों में इन्हें लागू करने में शायद ही प्रतिरोध का सामना करना पड़ा होगा ,क्यूंकि ये लोक कल्याण के लिए लाया जाने वाला एक अनिवार्य कानून है | किन्तु जिस तरह से पिछले कुछ समय से भाजपा सरकार के हर फैसले , सरकार द्वारा लाए गए हर कानून का विरोध करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र चलाया जा रहा है , इस बात की पूरी आशंका है कि पहले से ही बच्चों को खुदा की देन कह कह कर जनसंख्या नियंत्रण के हर उपाय और नियम ,यहाँ तक कि बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए चलाए गए अभियान पल्स पोलियो अभियान का भी जानबूझकर विरोध किया |

इस बार भी इस बात की पूरी पूरी संभावना है कि ,जनसंख्या को नियंत्रित करने वाले किसी भी कानून को ,एक विशेष वर्ग , एक नकारात्मक और अवरोधक विचार वाले कुछ चुनिंदा लोग , भी उसी विरोध वाली फेहरिश्त में डालने का प्रयास करेंगे ,जो उन्होंने पिछले दिनों वर्तमान सरकार के और कई बार तो न्यायपालिका के निर्णय पर भी सिर्फ असहमति ही नहीं बल्कि विरोध तक जता दिया |

मौजूदा सरकार , बहुत से अलग कार्यों को अलग तरीके से करने के अतिरिक्त जो एक कार्य बहुत बारीकी और पूरी तरह वैधानिक सिद्धांतों का पालन करते हए कर रही है वो है , मौजूदा कानूनों में सामयिकता की कसौटी वाले आवश्यक सुधार और भविष्य के लिए ,देश समाज के कल्याणार्थ कठोर और स्पष्ट कानूनों का निर्माण | देश की पूरी जनता भी ऐसे ही फैसलों और कानूनों को लाए जाने के पक्ष में एक नहीं बल्कि दो दो बार और पहले से भी अधिक प्रचंड होकर अपने लिए सरकार चुन चुकी है | सरकार ने काम शुरू कर दिया है वो भी न्यायिक अनुपालन के समानुपाती |

बात बार पर चिल्ला चिल्ला कर , कागज़ नहीं दिखाएंगे , कानून नहीं मानेंगे जैसी राष्ट्र और समाज विरोधी सोच वालों के लिए अब ये निश्चित रूप से खुद को इस बात के लिए तैयार रखने  का समय है कि इस सोच और रवैये को ही बरकरार रखे हुए ये तमाम लोग , धीरे धीरे खुद ही समाज से अधिक कानून के दोषी होते चले जाएँगे | वैसे हकीकत तो ये है कि असल में ,सबसे अधिक कागज़ , समाज के इन रंगा और बिल्ला को ही दिखाना पड़ता है और ये भाग भाग कर दिखाते हैं ,दौड़ दौड़ के

बड़ा पप्पू to छोटा पप्पू

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मेरे प्यारे पप्पू ,

खुश रहो | आज तुमने मेरे लिए जो भी लिखा/लिखवाया वो मैसेज मुझ तक पहुँच गया | यूँ तो मैं तुम्हारे सारे ट्वीट्स पढ़ कर ही समझ गया कि ये तुम्हारे लिए जो भी ये ट्वीट लिख रहा है ये जरूर ही तुमसे भी थोड़ा ज्यादा ही नालायक है पक्का , एक तो स्पेलिंग मिस्टेक ,फिर ग्रामेटिकली मिस्टेक और फिर फैक्चुअलि मिस्टेक , इतनी सारी क्रिएटिविटी आखिर कौन दिखा सकता है एक पोस्ट में रे | खैर

तो आज मैं भी तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ | पप्पू बेटे ,एक समय हुआ करता था जब मैं भी ठीक तुम्हारी ही तरह था (अरे पप्पू नहीं , वो तो मैं बाद में बना था ) पोलिटिकल साईंस में जीरो नॉलेज वाला और असल में तो मुझे जरूरत भी नहीं थी पोल साईंस की | मैं तो आराम से हवाई जहाज उड़ाता फिर रहा था | ये जो सिंगापुर मलेशिया थाईलैंड जाते रहते हो न तुम “चिंतन” के लिए , मैं इटली जाया करता था | लेकिन हाँ , इस मामले में तुम मेरे से बड़े पप्पू हो गए | आज तक यूँ ही रुण्ड मुंड घुमते फिर रहे हो ? ?

तुम्हारी दादी जैसे बड़े पेड़ के गिरने के बाद ,पार्टी द्वारा किए गए जनसंहार के बीच सबने मुझे प्रधानमंत्री पद पर बिठा दिया और नाम दिया “मिस्टर क्लीन ” | मिस्टर क्लीन | जबकि घोटालों के दादा जी “बोफोर्स घोटाला” भी मेरे ही स्वर्ण काल में हुआ था | लेकिन देखो मेरा जलवा कि इतना समय बीत जाने के बाद भी जब भी कोई ये कहता है कि इस देश में ये तरक्की कौन लेकर आया तो सिर्फ दो ही नाम लिए जाते हैं -एक नाना लेहरू जी और दूसरे नवासे मिस्टर क्लीन जी |

सुनो बेटा , तुम आजन्म पप्पू ही रहना चाहते हो और यही तुम्हारी उत्कट इच्छा है ये भी समझ गए हैं सब ,और अब तो तुम धीरे धीरे इस मामले में एक्सपर्ट भी होते जा रहे हो | मैं ये भी समझ गया हूँ कि बापू की आत्मिक इच्छा कांग्रेस को पूरी तरह से ख़त्म कर देने वाली कसम को तुम और सिर्फ तुम ही पूरा करके रहोगे | बेटा जो कम्प्यूटर और इंटरनेट की क्रान्ति मैं लेकर आया था ,कभी उसी पर कांग्रेस का जुलुस/मैयत निकलेगी ये तो दूर दूर तक नहीं सोचा था |

पप्पू बेटे ,ये वीडियो वाला आइडिया किसका था ? जिसका भी था/है ,कम से कम  उसको तो सब्जेक्ट की जानकारी रहे न ,बैक अप के लिए | इधर तुम्हारी वीडियो  में कभी घड़ी के समय से , तो कभी तुम्हारे छोटे बड़े बालों वाली गलती पकड़ कर लोग बाग़ कंटेट से ज्यादा विज़ुअल का मजा उठा  रहे हैं ,ये जानकर भी मन पता नहीं कैसा कैसा सा हो गया रे |

प्यारे पप्पू ,  नोटिस थमा के सरकार ने  तुम्हारे दादी की नाक (नासा ने साबित किया है कि दादी से पोती की नाक हूबहू मिलने की इस तरह की ये पहली खगोलीय ) से मिलती जुलती तुम्हारी दीदी की नाक से बँगला तक खाली करवा लिया | पप्पू , तुम्हारे जीजू भी पिस्सू निकले एकदम , कितनी ही धरती हड़प ली मगर ये हड़प की हवस मिटाए न मिट रही है |  उन्ने कओ अब ज़माना वो नहीं रहा |

तो बेटे ,इन शॉर्ट बस ये समझो कि ,बहुत बढ़िया जा  रहे हो , इस  दुनिया में हर कोई अपना नाम ,काम ,योगदान देने के ,लिए ही आता जाता है और युगों में कोई एक ही इतना ,इतना ज्यादा , बहुत से भी बहुत ज्यादा बौड़म होने के कारण 50 पार का युवा ,प्यारा पप्पू बन पाता है | ये किसी भी पार्टी पोस्ट और दुनिया से भी अलहदा यानि आउट ऑफ वर्ल्ड वाली क्वालिटी है बेटे | जुग जुग जियो , खूब गांजा पियो |

“कुछ भी करने का ,खुदा का ईगो hurt नई करने का “

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इस मासूम दुनिया को आखिर कब ,आखिर कितने दंगे फसादों , कितने आतंकी हमलों ,तकरीरों ,फतवों के बाद जाकर एहसास होगा कि खुदा बहुत ही ज्यादा fragile हैं , बोले तो नाज़ुक , कोई भी कब्बी भी खुदा के अगेंस्ट नहीं बोलने लिखने का | डेनमार्क भूल गए ,एक कार्टून का चित्रांकण से लेकर बहुत सालों बाद उसके प्रकाशन  करने वाले अखबार तक को इस गुनाह-ए-अजीम के लिए अपनी जान तक देनी पड़ी थी |

ईश निंदा बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं है इन अमन पसंद बाशिंदों को | लेकिन इन्हें ये नियम सिर्फ  उन पर लागू करना है जो बकौल इनके काफिर हैं | इनके अपने खुदा के अलावा जितने भी खुदा हैं उनकी खुदाई से कोई सरोकार नहीं है इन्हें | गजवा ए हिन्द का ख्वाब देखने वाले ये सूरमा लोग यूँ  जलसे जुलूस दंगे में बड़े गर्व से कहते फिरते हैं कि विश्व में 56 मुस्लिम देश हैं 56 ,मगर जैसे ही कोई मुहम्मद साहब ,पैगम्बर मुहम्मद आदि के जीवन चरित आदि पर कोई कुछ बोल दे ,लिख दे ,कह दे बस वहीं से मजहब बौखला जाता है | 

ये तो कुरान की शान्ति का पैगाम ही है जो ईश निंदा की प्रतिक्रया में ये शान्ति दूत सम्प्रदाय मात्र छोटे बड़े दंगे , हिंसा ,लूट ,आगजनी ,तोड़फोड़ आदि जैसे कदमों का सहारा लेते हैं नहीं तो खुदा के खिलाफ जाने सोचने बोलने कहने वाले को तो इस पूरी कायनात में रहने का ही कोई हक़ नहीं | हाँ बार बार आपको ध्यान ये दिलाया जा रहा है कि ऐसा सिर्फ और सिर्फ खुदा के मामले में ही ये एप्लीकेबल होगा/होता है |

हिन्दू देवी देवताओं ,प्रतीकों ,आस्थाओं तक को भला बुरा कहना ,गाली देना ,उपहास और मजाक का विषय बनाना , जूते चप्पल से लेकर अन्तः वस्त्रों तक पर उनका चित्रण करना ये सब करने रहने से कभी भी किसी को भी न तो ये डर सताता है कि इन सबके बदले में उसे ,उनके मकान दूकान को फूँक डाला जा सकता है | हिन्दू ठहरे आखिर सहिष्णु प्राणी ,क्या होगा ज्यादा से ज्यादा कहीं विरोध स्वरूप कुछ लिख बोल देंगे ,मगर दंगे करना शहरों को जला कर राख कर देना ,इतनी काबलियत और कलेजा नहीं है हिन्दुओं में | 

ऐसे में हिन्दू ,सिक्ख ,ईसाई ,यहूदी ,पारसी आदि जितने भी गैर मुस्लिम धर्म पंथ हैं सबको और सबके अनुयायियों को ये बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि चाहे मकबूल फ़िदा हुसैन ,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में माँ सरस्वती का नग्न चित्र बना दे , चाहे राहत इंदौरी और मुनव्वर राणा जैसे स्वघोषित मिर्ज़ा ग़ालिब लोग शायरी और गजल गायकी के बहाने से दूसरे धर्म और दूसरे सभी लोगों को कोसते गलियाते रहें ,और चाहे इससे भी ज्यादा कुछ होता रहे मगर चूंकि सिर्फ और सिर्फ खुदा ही fragile (नाजुक ) हैं ,इसलिए इनके मामले में कुछ भी कहा सुना देखा नहीं जा सकता नहीं तो बाद में दंगे ,ह्त्या ,लूट आदि ही देखने को मिलता रहेगा दुनिया को |

बंगलौर में कांग्रेस के विधायक के एक रिश्तेदार ने फेसबुक पर कोई आपत्तिजनक बात लिख दी और जिस तरह से उसके विरोध में शहर और थाने फूँक दिए गए उसीसे सबको ये भी पता चल गया कि वो पोस्ट पैगम्बर मुहम्मद साहब के विषय में लिखी गई थी | इस घटना ने कई सारी बातों को प्रमाणित किया | कांग्रेस ही नहीं ,उनके विधायक ही नहीं बल्कि विधायकों के रिश्तेदार तक बावली पूँछ हैं जो राहुल गांधी पर पोस्ट लिखने की बजाय मुहम्मद साहब पर लिख रहे हैं | 

फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल नेट्वर्किंग प्लेटफॉर्म ऐसी बातों के लिए एकदम उत्प्रेरक का काम करते हैं , चुप्पे से ऐसी आग लगा देते हैं कि पूरा शहर समाज देश भक्क करके जल उठता है | समाज के तमाम ज़ाहिल इन कामों को करने में सिद्धहस्त हो चुके हैं | टिक टोक जैसे एप्स  के बंद हो जाने के बाद तो इनकी कुंठा अपने चरम पर है |

इसलिए चलते चलते एक बार फिर आपको बता दूँ

“कुछ भी करने का ,खुदा का ईगो नहीं हर करने का “

सिरदर्दी का सबब : व्हाट्सएप ग्रुप

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इंसान अपने खुराफाती दिमाग के कारण हमेशा ही दोधारी तलवार की तरह सोचता और करता है | यही वजह है कि उपयोग के साथ उसका दुरूपयोग भी होने की संभावनाएं तलाश ली जाती हैं | इन दिनों तो अपने लिए मुसीबतें गढ़ने का समय है |

तकनीक का उपयोग और फिर उसकी आदत ,धीरे धीरे कब उन तकनीकों के उपयोग के शिष्टाचार से बाहर कर देती है उसका पता भी नहीं चलता | और एक मज़ेदार बात ये भी है कि तकनीक इतनी तेज़ी से बदल रही है कि कौन कब आऊट डेटेड हो जा रहा है पता ही नहीं चलता हाँ हो जाएगा ये निश्चित है |

आज एक अकेले मोबाइल ने चिट्ठी , रेडियो ,घडी ,कैमरे ,और पेजर तक को इतिहास की बातें बना कर रख दिया | आज मोबाइल हमारे अनिवार्य से भी जरूरी साथी के रूप में अपनी जगह बना चुका है ,और इसके सहारे किसी खेल ,किसी एप्प की जो लत लगाई /लगवाई गयी है वो कितने खतरनाक स्तर तक दिलो दिमाग पर छाई हुई है इसका अंदाज़ा सिर्फ टिक टॉक और पब जी जैसे एप्स के बंद किये जाने के बाद इनके उपयोगकर्ताओं की निराशा से ही लग जाता है | 

सोशल नेट्वर्किंग (वो भी आभासीय /अंतर्जालीय ) आज इस सोशल डिस्टेंसिग के समय में तो जैसे अचानक किसी मुश्किल के हठात मिले हल की तरह से सामने आया है |  आज व्हाट्सएप ,फेसबुक, ट्विट्टर ,इंस्टाग्राम आदि जैसे सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल प्लेटफॉर्म्स से कौन नहीं जुड़ा हुआ है ? अपनी अपनी रूचि के अनुसार सब इन विकल्पों पर अपनी सहभागिता करते हैं | लेकिन सिक्के के दो पहलुओं की तरह यहां भी मामला दोतरफा ही होता है |

ट्विट्टर जहां ट्रोल किए और कराए जाने को लेकर कुख्यात होता जा रहा है तो सबके फोन में एक सबसे अनिवार्य चैट एप ,व्हाट्स एप में ग्रुप यानि समूह फीचर से |

हालांकि इन एप्स के निर्माता इंजिनियर लगातार इनमें फेरबदल करके नई नई तकनीक से इसे और अधिक उपयोगी और समुन्नत बनाते रहते हैं | व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाना ,सभी साथियों को उसमें जोड़ना , समूह के संचालन के लिए समूह का प्रशासक बनाना ,किसी एक उद्देश्य के लिए ,सूचना व् संवाद के लिए जैसे बहुत सारे विभिन्न उद्देश्यों से शुरू किये गए ये व्हाट्सएप ग्रुप जल्दी ही सुबह शाम वाले स्टिकर संदेशों से भरने लगते है और फिर दिन रात स्तरहीन चुटकुलों , भ्रामक जानकारियों आदि के सन्देश घूम घूम कर अलग अलग ग्रुप में आकर बार बार मोबाइल वाले को मुंह चिढ़ाते हैं |

अब लोग इतने सहनशील और नम्र नहीं रहे , आए दिन अब तो इस तरह की खबरें देखने पढ़ने सुनने को मिल जाती हैं की अमुक ग्रुप संचालक को समूह के एक सदस्य ने समूह से बाहर निकाले जाने को लेकर नाराजगी में उसका सर फोड़ दिया | या फिर कई बार पारिवारिक सदस्यों के साथ शुरू किये हुए ग्रुप किसी छोटी सी बात से शुरू होकर तिल का ताड़ होते हुए सारे आपसे प्रेम भाव को भी पलीता लगा देते हैं |

असल में इन व्हाट्सएप समूहों पर अक्सर होता ये है कि , कोई एक सदस्य टिप्पणी करता है ,कई बार किसी दूसरे सदस्य के लिए करता है , बीच में तीसरा सदस्य आकर उस में अपनी बात रख देता है और चौथा आकर उसे अपने तरीके से सोच और समझ लेता है | 

लगाकर आने वाले नोटिफिकेशन भी उपयोगकर्ता के लिए एक नियमित सा टेंशन एलर्ट रहता है ये ,न देखे तो आवश्यक सन्देश भी उसी नोटिफिकेशन की भीड़ में कहीं गायब हो जाएंगे और यदि देखें तो फिर क्या क्या देखें और कितना देखते रहें |

व्हाट्सएप समूह धीरे धीरे बकैती का अड्ड़ा बननाए जाने और पीछे से सरकाए हुए सारे संदेशों को आगे के समूहों में उझीलने के पवित्र उद्देश्य से निर्मित किया गया था या किसी और कारण से ये तो पता नहीं मगर विद्या माता की कसम , दुखी कर रखा है इन व्हाट्स एप समूहों ने जी |

 

सुशांत की मौत :एक न सुलझने वाला अपराध

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आपको कुछ सालों पहले घटी घटना आरुषि तलवार हत्याकाण्ड अभी जेहन से पूरी तरह तो भुलाई नहीं जा सकी होगी | वही दिल्ली से सटे नोएडा एक फ़्लैट में 14 वर्षीय एक बालिका की नृशंस ह्त्या जिसमें लाख कोशिशों के बावजूद भी आजतक किसी को पता नहीं चला की वास्तव में आरुषि तलवार का हत्यारा था कौन ?

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि अक्सर समाज में किसी न किसी को ये कहते सुनते पाया है की ” अपराध कभी नहीं छुपता ” लेकिन अब इस पंक्ति पर रत्ती भर भी यकीन नहीं होता | पुलिस हर साल अलग से उन घटनाओं और अपराधों की सूची जारी करती है जो पुलिस अनुसंधान में अपने अंजाम तक नहीं पहुँच पाते |

यही सब कुछ अब हाल ही में विवादास्पद मृत्यु का शिकार हुए सुशांत सिंह राजपूत के सारे घटनाक्रम में | इस नवोदित सितारे की अचानक और संदेहास्पद मौत की घटना ने हिंदी सिनेमा में एक भूचाल ला कर रख दिया है |

इन दिनों हिंदी सिनेमा में चल रही हर गलत प्रवृत्ति , प्रचलन और व्यवहार पर सार्वजनिक विमर्श द्वारा दर्शकों के सामने उस चकाचौंध भरी करिश्माई फ़िल्मी दुनिया का क्रूर सच सामने लाया जा रहा है | बात चाहे भाई भतीजावाद को लेकर हो या फिर , एक खास गुट द्वारा हिंदी सिनेमा पर जबरन दबदबा बनाए रखने की कोशिश की , गैर सिनेमाई परिवेश से आने वाले नए कलाकारों के साथ अमानवीय स्तर तक दुर्व्यवहार और शोषण , हिंदी सिनेमा में अपराध जगत द्वारा पैसे के निवेश का खेल आदि जैसे बहुत सारे अनछुए पहलुओं पर अब गहराई से पड़ताल शुरू हो गई है |

सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने जैसे एक उत्प्रेरक घटना का काम कर दिया है और ऐसा लग रहा है जैसे सिने जगत का हर अभिनेता ,कलाकार ,आदि जल्द से जल्द अपना अपना सच स्वीकार करके इस बोझ से बाहर आने का प्रयास कर रहे हैं | और ये आने वाले हिंदी सिनेमा के लिहाज़ से भी निर्णायक ही साबित होगा |

एक जाने माने अभिनेता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है | स्थानीय पुलिस जो लगभग 40 दिनों की जांच पड़ताल ,पूछताछ और अन्वेषण के बावजूद एक शब्द आधिकारिक रूप से बताने को तैयार नहीं है ये तक नहीं कि पुलिस जांच आखिर जा किस दिशा में रही है |

इस बीच सुशांत की मौत ने जहाँ आम दर्शकों को अपने चाहते अभिनेता की मृत्यु के सच को जानने के लिए उद्वेलित किया और बार बार इस घटना की सीबीआई जांच की माँग उठने लगी | नए घटनाक्रम में सुशांत राजपूत के परिवार द्वारा सुशांत की पूर्व महिला मित्र रिया को नामजद कर प्राथमिकी दर्ज़ कराई गयी है | इसके बाद मौजूदा हालात में महाराष्ट्र ,बिहार पुलिस के अतिरिक्त प्रवर्तन निदेशालय भी अपने स्तर पर इस मामले को देख रहा है |

लेकिन इन सबके बीच जो सबसे अहम् बात दरकिनार हो रही है वो है घटना के बाद बीत जाने वाला एक एक दिन | जैसे जैसे दिन निकलते जाएंगे साक्ष्यों ,गवाहों ,आदि के लिए अनुसंधान किये जाने और उससे पुख्ता सच बाहर आने की संभावना दिन पर दिन क्षीण होती जाएगी |

इस घटना के पूरे अनुसंधान और अन्वेषण के उपरान्त इसका परिणाम चाहे जो भी निकले ,दोषी एक या एक से अधिक व्यक्ति निकलें | किन्तु इतना तो सत्य है की हिंदी सिनेमा की इस चमकती दमकती दुनिया के अंदर बहुत ही घिनौना और वीभत्स चरित्र छुपा हुआ है और लगातार अपना शिकार बना रहा है अलग अलग नामों से | कभी जिया खान तो कभी सुशांत सिंह राजपूत के नाम से |

बाढ़ बनाम बिहार : मुकदमा जारी है श्रीमान

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गृह प्रदेश बिहार के साथ बहुत सारी विडंबनाएं जुड़ी हुई हैं और जितनी अधिक विडंबनाएं हैं उतनी ही ज्यादा बुरी स्थिति इस राज्य की बन जाती है जब यकायक ही कोई आपदा घेर ले | इस बार चुनौती (जो कभी बिहार प्रशासन के सामने आती नहीं है ) ज्यादा इसलिए भी दिख रही है सामने क्यूंकि आदतन हर साल आने वाली बाढ़ के अतिरिक्त इस बार कोरोना महामारी ने भी लोगों को लीलना शुरू कर दिया है |

मैंने जबसे होश सम्भाला है तब से लेकर आज तक बिहार का शोक कह कर पढ़ाई और बदनाम की जाने वाली नदी के अथाह पानी का लाभ उठाना तो दूर हर साल उसके नाम पर लाखों करोड़ों रूपए कुछ ख़ास लोगों के हिस्से में चले जाते रहने की रवायत ही देखता सुनता रहा हूँ |

इतने लम्बे समय के बीत जाने  भी , देश भर में नई तकनीक और नई संसाधनों से ,कई दशकों तक कोई सुधार नहीं किया गया | हर साल इन बारिश के मौसम में बैठ कर सिर्फ ये समाचार देश भर को देते रहना कि बाढ़ ने यहां इतना ऐसे नुकसान  कर दिया |

सिर्फ कोसी ही क्यों ,कमला ,बलान आदि जैसे उपनदियों से भी हर साल ऐसा ही आपदा और आफत की खबरें सुनने देखने को मिलती हैं | कल्पना ही की जा सकती है  कि यदि थोड़ा थोड़ा भी इस दिशा में कुछ करने की शुरुआत की गयी होती तो हालात दिनों दिन सालों साल बद से बदतर नहीं होते जाते , या कहा जाए कि ऐसे ही हालत जान बूझ कर बनाए रखे जाते |

अभिलेख कर साक्ष्य बताते हैं की राज्य में कम से कम 83 ऐसी जांच चल रही हैं जिनमे आपदा राशि के साथ छेड़ छाड़ और उस राशि की लूट खसोट से जुड़ा भ्रष्टाचार ही मुख्य अपराध है | ये स्पष्टतया इशारा करता है कि राजेनता और प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी सुनियोजित मिलीभगत के बिना दशकों तक इतना बड़ा भ्रष्टाचार करते चले जाना संभव नहीं है |

बिहार के उद्धार के नाम पर , कभी भोजपुरी तो कभी मैथिलि के नाम पर देश से लेकर विदेशों तक में चल और चलाए जा रहे तमाम आन्दोलनों को भी आपसी प्रतिद्वदिता त्याग कर एक लक्ष्य को निर्धारित कर सबको उसके लिए काम करना चाहिए | एक संगठन एयरपोर्ट को मुद्दा बनाए हुए है तो दूसरा चिकित्सा व्यवस्था को ,तीसरे को राजनीति करनी है और चौथे को उसके नाम पर ख्याति हासिल करनी है |

इस परिवेश में फिर आखिर कार ये वर्षा ही क्यों प्रतिक्रियाविहीन रहे सो बार बार पलट कर पिछली बार से अभी अधिक खतरनाक हो कर सामने आ जाती है और अभी ये सिलसिला टूटने वाला भी नहीं है

 

आइये बागवानी शुरू करें

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इस वर्ग में लिखी गई पोस्टों में  , यहाँ उपलब्ध कराई गयी जानकारियाँ ,  आदि मेरे पिछले एक दशक से अधिक समय से दिल्ली की एक फ़्लैट की छत पर की जा रही बागवानी के वो अनुभव हैं जो मैंने इस क्रम में सीखा और समझा | बागवानी में दक्ष नहीं कहूँगा हाँ पौधों का अच्छा दोस्त जरूर हो गया हूँ मैं | तो आइये शुरू करते हैं बागवानी करना :-

जो भी बागवानी शुरू करना चाह रहे हैं , यही सबसे उपयुक्त समय है | शुरू हो जाइये और जो भी उगना लगाना चाह रहे हैं फ़टाफ़ट लगा दें | मानसून की बारिश इन पौधों के लिए वही काम करती है जो बच्चों के लिए बोर्नवीटा या हॉर्लिक्स करते हैं |

पौधों को खाद पानी देने का भी यही उचित समय है , अभी बारिश की बूंदों के बीच वे जड़ों और मिटटी में खूब रच बस जाएंगे और और जैसे जैसे धूप नरम पड़ती जाएगी सब कुछ गुलज़ार हो उठेगा |

जिन पुराने पौधों में कलियाँ और नए पत्ते आते नहीं दिख रहे हैं उनकी प्रूनिंग के साथ साथ निराई गुड़ाई भी समय है | मानसून में तो धरती का सीना चीर कर हरा करिश्मा बाहर निकल जाता है तो जैसे ही आप उनकी कटिंग करके छोड़ देंगे अगले महीनों में वे कमाल का रंग रूप निखार लेंगे | जिन्हें गुलाब ,आम ,नीम्बू आदि की कलम लगानी आती है उनके लिए भी यही सबसे उपयुक्त समय है |

धनिया , साग , मेथी आदि को लगाने उगाने से फिलहाल परहेज़ ही करें अन्यथा अचानक कभी भी आने वाले तेज़ बारिश आपकी मेहनत पर पानी फेर देंगे |

शुरुआत में यदि बीज से खुद पौधे उगाने में असहज महसूस कर रहे हैं तो आसपास नर्सरी से लेकर आ जाएं | इस मौसम में बेतहाशा पौधों के अपने आप उग जाने के कारण अपेक्षाकृत वे आपको सस्ते और सुन्दर पौधे भी मिल जाएंगे |

बस….तो और क्या , हो जाइये शुरू अपने आस पास खुश्बू और रंग का इंद्रधुनष उगाने के लिए | कोई जिज्ञासा हो तो बेहिचक कहिये , अपने अनुभव के आधार पर जितना जो बता सकूंगा उसके लिए प्रस्तुत हूँ |