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आमिर खान को अब नहीं लग रहा भारत में रहने में डर : तीसरी शादी की तैयारी में 

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लोगों को ये भूला नहीं है कि अभी कुछ समय पहले ही , देश में मोदी सरकार के आने के बाद से ही मुगलों ने असहिष्णुता का जो राग अलापना शुरू किया था उसे , आमिर खान , नसरुद्दीन शाह ,जावेद अख्तर ,मुनव्वर राणा जैसे घाघ मुसमलमानों ने और हवा दी थी।  अपने बयानों और कथनों से दुनिया के सामने भारत की ऐसी छवि बनाने की कोशिश की थी जिससे लगे कि , भारत में अल्पसंख्यकों पर भारी जुल्म किया जा रहा हो यहाँ तक कि उनकी रोजी रोटी और निर्वाह का भी संकट उत्पन्न हो गया हो और वे सब अचानक ही असुरक्षित महसूस करने लगे हों।

इसी क्रम में -मिस्टर परफेक्शनिस्ट अभिनेता आमिर खान -जिन्होंने अपनी सिनेमा में -हिन्दू धर्म , सनातन का उपहास उड़ा कर , उन्हें अपमानित करके भी करोड़ों रूपए कमाए , नाम कमाया -उन्हें यकायक ही मोदी सरकार के आने भर से ये देश , भारत रहने लायक नहीं लगने लगा और उन्होंने  इसे छोड़ कर जाने की बात कह दी।  लेकिन यहाँ भी अपनी धूर्तता दिखाते हुए उन्होंने ये कथन भी अपनी पत्नी किरण राव के मुख से ही निकलवाया।

और अब इत्तेफाक देखिये कि आमिर खान की जिस पत्नी को देश में रहने से डर लग रहा था और वो उन्हें भारत छोड़ कर जाने के लिए कह रही थीं आमिर ने उस पत्नी को ही छोड़ दिया।  खबरों की मानें तो अब आमिर खान अपनी बेटी की हमउम्र और अभिनेत्री फातिमा सना शेख के साथ तीसरी शादी करने की तैयारी में हैं।  आमिर इससे पहले दो शादियाँ कर चुके हैं और जहाँ अभी हाल ही में आमिर ने अपनी दूसरी पत्नी किरण राव को तलाक दिया है तो वहीं आमिर की बेटी की शादी भी अभी कुछ दिनों पहले ही हुई है।

फिल्मों से लेकर , टेलीविजन तक , तरह तरह की सामाजिक समस्याओं और सन्देश देने वाली फ़िल्में और धारावाहिक बनाने वाले आमिर खान खुद की ज़िंदगी में कितने दोगले हैं इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि – आमिर के भाई फैज़ल खान -आमिर के ऊपर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उनकी संपत्ति हड़पने का आरोप लगा चुके हैं जबकि उनकी खुद अपनी बेटी ने उन पर आरोप लगाया कि जब वे घर में यौन हिंसा का शिकार हुईं तो आमिर और परिवार ने उन्हें चुप रहने को कहा।

अब ये भी जान लीजिए कि , दुनिया को नसीहत देने वाले आमिर तीसरी शादी , जिस अभिनेत्री से करने जा रहे हैं कुछ वर्षों पहले तक वो फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में नज़र आईं थीं और आमिर अभिनीत फिल्म दंगल में उन्होंने आमिर की बेटी का अभिनय किया था।  लेकिन आमिर जिन सिद्धांतों को मानते अपनाते हैं वो उन्हें इस बात की इजाजत देता है और अभी भी कौन सा देर हुई है , आमिर अपने शरीया कानूनों के हिसाब से अभी तो एक और शादी कर सकते हैं।  क्या पता -उनकी अगली बेगम का जन्म अभी हुआ हो या न हुआ हो।

प्रधानमंत्री मोदी के मुंह से औरंगजेब का नाम सुनते ही मुगलों में बढ़ी बरनोल की बिक्री

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प्रधानमंत्री मोदी के मुंह से औरंगजेब का नाम सुनते ही मुगलों में बढ़ी बरनोल की बिक्री

ये तो होना ही था और कहें कि ये तो होता ही है , जब भी प्रधानमंत्री मोदी सनातन से जुड़े किसी भी प्रतीक या स्थल पर पहुँचते हैं तो , कांगी वामी समेत तुष्टिकरण से अब तक , अपनी राजनीति की दुकान और धंधा चलाने वाले तमाम विपक्षी और उनके साथ साथ पूरी मुग़ल जमात जैसे गर्म तवे पर बैठ कर उछलने लगती है। और फिर जब अवसर हो बाबा विश्वनाथ भोला महादेव की नगरी काशी को दोबारा से भव्य और दिव्य बनाने के अपने संकल्प को पूरा करने के जयघोष की तो फिर तो कहना ही क्या।  विरोधी चारों तरफ सिर्फ बरनोल ही तलाशते फिर रहे हैं , और करें भी क्या ??

प्रधानमंत्री मोदी ने , इस बार न सिर्फ ,  मुगलों के अब्बू और दादू हज़ूर , औरंगजेब का नाम क्रूर आक्रमणकारी के रूप में लिया बल्कि सार्वजनिक रूप से यह भी उद्घोष कर दिया कि , जब जब इस देश पर कोई औरंगजेब अपनी कुत्सित नज़र और हैवानियत लिए खड़ा होगा उसके सामने छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा देश का कोई सपूत भी जरूर आएगा और उसके सारे घमंड का मर्दन करके रख देगा।

विपक्षी जो पिछले सात सालों से यूँ ही बौराए बौखलाए से घूम रहे हैं उनके नेतृत्वकर्ताओं को यही नहीं पता चल रहा है कि आखिर वे इन सब पर प्रतिक्रया दें भी तो कैसी प्रतिक्रया दें।  कल राहुल गाँधी “महंगाई हटाओ रैली ” में हिन्दू और हिंदुत्ववाद पर कांग्रेसी डिक्शनरी का भावार्थ समझा रहे थे तो आज अखिलेश झुंझलाते हुए – काशी बनारस को , अंतिम समय पर जाया जाने वाला स्थान बताकर , प्रधानमंत्री मोदी पर ताना मार रहे थे।

अगले कुछ महीनों में ही, अनेक राज्यों में होने वाली  विधानसभा चुनाव में अपनी संभावित हार के बाद फिर वही ईवीएम का रोना रोने के लिए पहले ही तैयार होते विपक्षी असल में अब अपने ही बुने जाल में फँसते नज़र आ रहे हैं।  हमेशा ही हिन्दुओं , सनातन , मंदिरों , नदियों की उपेक्षा करते हुए और तुष्टिकरण के सिद्धांत और फार्मूले को अचूक मान कर विशेष मज़हब और ख़ास जमात के साथ ही अपनी राजनैतिक साँठ गाँठ करते थे।

अब जबकि , मोदी सरकार एक एक करके , सनातन के सारे प्रतीक स्थलों , भगवान् राम , कृष्ण और आदि देव महादेव से जुड़े दिव्य स्थलों के जीर्णोद्धार करके , उनका पुनर्निमाण करके , उनका सौंदर्यीकरण करके , पूरी दुनिया में सनातन का डंका , सनातन का जय घोष फिर से स्थापित कर रहे हैं तो ऐसे में विपक्षियों को समझ ही नहीं आ रहा है कि वे किसके पक्ष में रहें और किसका विरोध करें।

सूत्रों की माने तो , अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा में भी कृष्ण जन्भूमि के पुनरुत्थान की दिशा में सरकार और सम्बंधित विभाग अग्रसर हो चुके हैं।  ज्ञात हो कि इस सम्बन्ध में पहले ही दायर याचिका में अदालत ने पुरातत्व विभाग को सारे साक्ष्य एकत्र करके रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दे दिया है।

जो भी हो , इतना तो तय है कि आने वाले समय में सनातन का ये जयघोष और अधिक प्रचंड और तीव्र होगा और देव कार्य में जो भी जहाँ भी जैसे भी बाधा बनेगा या डालेगा , काल स्वयं उसका सारा हिसाब किताब करेगा।  जय सनातन , जय हिन्दू धर्म।  जय हिन्द।

एक देश एक कानून से ही बंद होगा ये सब तमाशा

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थोड़े थोड़े दिनों के अंतराल पर , जानबूझकर किसी भी बात बेबात को जबरन तूल देकर मुद्दा बनाना और फिर उसकी आड़ में देश , समाज , कानून , सरकार सबको बदनाम करने की साजिश रचना – बस यही सब बचा रह गया है कुछ मुट्ठीभर ,हताश और निराश लोगों के गुट के पास .

अभी थोड़े समय पहले , तीन तलाक पर , फिर धारा 370 पर , फिर आए नागरिकता संशोधन कानून के विषय पर , फिर कृषि कानून सुधार कानून पर , फिर सार्वजनिक रूप से सड़कों और अन्य स्थलों पर जबरन नमाज अता करने  और अब अचानक ने स्कूल कालेज में जबरन हिजाब पहनने की ज़िद और उसे रोके जाने पर किया जा रहा स्यापा और हंगामा . 

पूरी दुनिया , कोरोना महामारी से उबरने के बाद , अपनी धराशाई हो गई अर्थव्यवस्था , चरमराई अर्थव्यवस्था आदि को दुरुस्त करने में लगे हैं लेकिन यहां भारत में कुछ मोमिन और ख्वातीन -अल्ला हु अकबर करते हुए अपना जेहाद जारी रखे हुए हैं . उनकी खुशकिस्मती ये कि , भारतीय जनता पार्टी , केंद्र राज्य सरकार , मोदी योगी और सबसे अधिक हिंदुओं से द्वेष पाले हुआ विपक्ष भी ऐसे ही मौकों की तलाश में -फट्ट से उनके साथ मिल कर टूलकिट का हिस्सा बनकर वही सब कर रहा है .

इनकी बदकिस्मती ये है कि , अब इनकी ऐसी तमाम कोशिश भी , इस बदले हुए भारत के नए तेवर , नए संकल्प , नई शक्ति के आगे बार बार टूट कर हार रही हैं . भारत का बहुसंख्यक समाज अब ये निर्णय कर चुका है जिसमे यही तय किया जा रहा है कि – अब सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रहित , सनातन हित के लिए संकल्पित पार्टी और लोगों के साथ ही चलना है .

असल में बार बार , अलग अलग बहानों से देश और व्यवस्था को अस्थिर करने के तमाम अवसरों को सिरे से समाप्त करने का एकमात्र सही और समुचित उपाय है – एक देश एक संविधान और एक कानून . देश के सभी नागरिकों पर सिर्फ और सिर्फ एक ही कानून लागू किया जाना चाहिए और किसी भी सूरत में कैसा भी कोई भी संस्था या कानून इससे अलग और इससे ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए . 

भाजपा को साम्प्रदायिक दिखाते दिखाते खुद ही कट्टरपंथी हो गया पूरा विपक्ष

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यही होता है जब झूठ पर तरह तरह का लेप चढ़ाकर उसे सच बताने /दिखाने और साबित करने की कोशिश की जाती है और फिर सोशल मीडिया के जमाने में वक्त बेवक्त सारा सच झूठ उधड़ कर सामने आ जाता है। और जब समय चुनाव का हो तो कहना ही क्या ??

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जब प्रचंड बहुमत से सत्तारूढ़ हुई हो ये तभी स्पष्ट हो गया था कि प्रदेश की बहुसंख्यक सनातन जनता को अब काम से काम सालों से चली आ रही मुस्लिम तुष्टिकरण और अपराधियों के संरक्षण की प्रशासन नीतियों का खामियाज़ा तो नहीं ही भुगतना पडेगा।

अगले के कुछ सालों में , योगी सरकार ने क़ानून और व्यवस्था को पूरी ताकत दे और प्रशासन ने हर बड़े छोटे अपराधी भ्रष्टाचारी के सारे मंसुब पर बुलडोज़र फिरा दिया। इस चपेट में इत्तेफाकन बसपा , सपा द्वारा खड़े किए तमाम मुग़ल भी आ गए।

बस यहीं से शुरू हुआ योगी सरकार , और भाजपा को सिर्फ हिन्दू हितैषी और अल्संख्यक विशेस्कर मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश तथा इसके लिए किए जा रहे तरह तरह के प्रपंच एक तरफ जहां भाजपा सरकार ने अपनी छोटी बड़ी योजनाओं , कानूनों और बदलावों से समाज के हर वर्ग के कल्याण कार्य किए वहीँ पूरा विपक्ष धीरे-धीरे दोहरी दुविधा में फँसता चला गया।

एक तरफ खुद को हिन्दू विरोधी छवि से निकालने की जी तोड़ कोशिश के बाद थकहार कर चुनाव के समय समय अपने असली चरित्र और कट्टरपंथियों से साझेदारी के सहारे सत्ता पाने के रास्ते पर ही चलने को विवश हो गए।

इन सबके बीच जो बात बार बार स्वतः प्रमाणित हो जा रही है वो ये कि भाजपा साम्प्रदायिक हो न हो , , सिर्फ हिन्दू हितैषी बेशक साबित न हो पाए लेकिन इस चक्कर में कांग्रेस, सपा -बसपा समेत समूचा विपक्ष खुद ही कट्टरपंथी बन गया।

मुस्लिमों का मसीहा बनने के लिए क्यों जरूरी है :हिन्दुओं के विरूद्ध ज़हर उगलना

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सड़क पर चलता हुआ एक अदना सा कोई भी ; एक पुलिस अधिकारी को उसका चालान किए जाने को लेकर सार्वजनिक रूप से धमकाते हुए कहता है कि ये वर्तमान सरकार के सत्ता च्युत होते ही वे पुलिस -और अपरोक्ष रूप से सभी क़ानून व्यवस्था और प्रशासन को देख लेगा।

इधर तौकीर राजा , नावेद हसन से लेकर ओवैसी समेत सारे ही नए पुराने फतवा सूरमा एक साथ निकल पड़े हैं इस होड़ में कि कौन मुस्लिमों का सबसे बड़ा मसीहा खुद को साबित कर दे। लेकिन बदकिस्मती से ऐसे दावेदारी ठोंकने वाले तमाम मौलवी , उलेमाओं , अपराधी चरित्र बाहुबलियों से लेकर सफेदपोश राजनेताओं तक में से किसी ने भी मुस्लिम समाज की कठिनाइयों के लिए , लिए , उनकी शैक्षिक स्थिति में आमूल परिवर्तन , महिलाओं को बर्बर बंदिशों से आज़ादी, समाज की मुख्य धारा में सकारात्मक सहभागिता करने जैसी कोई भी एक भी बात इनका कोई लम्बरदार कहने करने को तैयार नहीं है।

हाँ , सरकार हमारी वाली तो अपराध और आतंक से ग्रस्त , दंगों-फसादों ,के चक्रव्यूह में फंसाए रखने वाली पहले जैसी सरकार आएगी तो दिखा देंगे। हमारे लड़कों ने अगर कानों हाथ में लिया तो हिन्दुस्तान का नक्शा बदल जाएगा। हिन्दू को भगाने की जगह नहीं मिलेगी। अगर सारे मुस्लिम एक साथ आ जाएं तो ________ब्ला ब्ला ब्ला।

बस यही ज़हर की दुकानदारी बची रह गई है अब तमाम द्रोहियों के पास। इतिहास में भी जब जब समाज संगठित होकर दृढ़ निश्चय से किसी बड़े परिवर्तन और विकास की ओर अग्रसर हुआ है , लोक कल्याण और राष्ट्रोत्थान के नाम पर अपना हित , स्वार्थ और कोष साधने वालों को खीज स्वाभाविक है।

ये तमाम विष वमनकारी , ये भूल जाते हैं कि अब स्थिति और हालत बिलकुल अलग हैं। ये नया भारत अब कुछ भी और किसी को भी बख्शने को तैयार नहीं है।

ममता से लेकर चन्नी तक : मोदी विरोध में मुख्यमंत्रियों द्वारा की जा रही बदगुमानी/दुर्व्यवहार -अनुचित परिपाटी 

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अब से कुछ ही महीनों पहले प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी की और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक आधिकारिक मुलाकात चर्चा का विषय बन गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ममता द्वारा प्रधानमन्त्री के प्रति किया गया निहायत ही उपेक्षित और गैरजिम्मेदाराना बयान की निंदा पूरे देश और सभी राजनैतिक दलों ने की थी।

इस बैठक में मुख्यमंत्री बनर्जी अपनी मांग और सहायता का पुलंदा , प्रधानमंत्री की उपश्तिथि में अधिकारियों को सौंप कर बिना किसी विचार विमर्श के यह कर कर निकल गईं कि उनका पहले से कोई अन्य कार्यक्रम तय है।

ठीक इसी तरह अभी कुछ दिन पहले ऐसे ही प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा कोलकाता में किए जा रहे कैंसर संस्थान के नवनिर्मित परिसर के उदघाटन कार्यक्रम के दौरान जानबूझ कर ये कहना कि , राज्य सरकार उनकी अगुआई में इसका उदघाटन पहले ही कर चुकी है भी सरासर अमर्यादित आचरण का प्रदर्शन किया गया।

इत्तेफाक देखिए कि , जाने कितने ही निजी आक्षेपों , अपमानजनक सम्बोधनों , साजिशों के बावजूद भी अत्यंत ही सरल , मृदुल और सहशीलता का परिचय देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों मोदी , भाजपा , सरकार और पूरे देश पर “असहिष्णुता ” का ठप्पा लगाने के लिए काँगी , वामी , धर्मद्रोही , राष्ट्रद्रोही ,सभी एक होकर तरह तरह का स्वांग रच रहे हैं।

मूल बात ये है कि ब्रितानी सरकार की गुडबुक्स में रहने वाली कांग्रेस इ भारतीय राजनीति में एक ही परम्परा को स्थापित किया और वो था /है गाँधी उपनाम को संतुष्ट किए रहना और सिर्फ और सिर्फ उनके प्रति ही सारी निष्ठा प्रतिबद्धता जताए रखना। प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल में कांग्रेस अध्यक्षा मैडम को ही सारी जानकारी सौंप कर निर्देश लेते रहे और अब मुख्यमंत्री चन्नी उसी परम्परा को बढ़ाते हुए कांग्रेस महामंत्री मैडम प्रियंका को सारी ब्रीफिंग कर रहे हैं।

ऐसे में हिन्दुस्तान की अंतिम पंक्ति से निकल कर एक साधारण व्यक्ति , प्रखर सनातनी और प्रतिबद्ध राष्ट्रवादी भी , यदि इतने बड़े जनसमूह का लोकप्रिय जननायक बन जाता है और यही बात राजनीति को पुश्तैनी कारोबार बना और समझ लेने वालों को नागवार गुजर रही है।

केंद्रीय सत्ता की विपक्षी पार्टियों की सरकारें और उनके मुखिया जिस तरह से प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदस्थ व्यक्ति की गरिमा और यहाँ तक कि उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किए जाने की हद तक गिर कर राज्य संघ शक्ति संतुलन व्यवस्था में एक गलत परिपाटी को जन्म दे रहे हैं। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए

20 करोड़ हैं :हम भी लड़ेंगे : फिर छलका नसीरुद्दीन शाह का मुग़ल प्रेम

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फिल्म जगत में पिछले कई दशकों से सक्रिय और अपने मज़हबी मुगलाई एजेंडे को चुपचाप चलाने वाले तमाम लोग इन दिनों नकली बौद्धकता और छद्म निरपेक्षता की केंचुली उतारने को मजबूर हो गए हैं।  एक तरफ जहाँ लोगबाग इनके इस छिपे हुए एजेंडे को अब बखूबी समझ कर इनकी सारी वाहियात पटकथा वाली फिल्मों का पुलंदा बांधे हुए हैं वहीँ सोशल नेट्वर्किंग साइट्स पर खुल कर बेबाकी से इन्हें आईना दिखा रहे हैं।  इन बेचैन  शख्सियतों में से एक जो इन दिनों बार बार अपने बयानों और वक्तव्यों के कारण चर्चा में हैं वो हैं -नसीरुद्दीन शाह।

अभी हाल ही में एक वेब पोर्टल को साक्षात्कार देते हुए  नसीरुद्दीन शाह का मुग़ल रक्त उछाल मार उठा और वे एक बार फिर से काफी कुछ अनर्गल और झूठ बोल गए जिसके कारण अब आम लोग उनकी लानत मलामत कर रहे हैं , नसीरुद्दीन शाह ने करन थापर के एक सवाल के जवाब में उत्तेजित होकर कहा कि , मुसलमान किसी भी नरसंहार के लिए  तैयार है और वे भी 20 करोड़ हैं जो समय आने पर पूरे भारत से लड़ेंगे।

इतना ही नहीं अपने भावावेश में वे उन आक्रमणकारी , आततायी , पाशविक मुगलों का भी गुणगान करने लगे और एक तरफ उन्हें शरणार्थी कह बना कर वही पुराना पीड़ित कार्ड खेल गए तो वहीँ साथ साथ ये भी जोड़ दिया कि ,  मुगलों ने इस देश में शरण लेकर , यहां की सभ्यता ,संस्कृति और स्थापत्य में भी बहुत ही सकारात्मक और सृजनात्मक सहभागिता की।

कुछ दिनों पहले ही नसीरुद्दीन तब  देश के कट्टरपंथीयों और अपने ही हममज़हबियों के निशाने पर तब आ गए थे जब उन्होंने ,देश  में रहने और तालिबान का समर्थन करने वालों को लताड़ लगाते हुए अपनी बात रखी थी।  और उस समय उनके अपनों ने ही -उन्हें सिनेमाई कलाकार होने के कारण और सिनेमा संगीत को इस्लाम में इजाजत नहीं होने के कारण -नस्सरूद्दीन शाह की बात को दरकिनार करने की बात कही गई।

ऐसा लग रहा है जैसे नसीरुद्दीन , कुछ समय पहले देश में असहिष्णुता असहिष्णुता कह कर छाती पीटने वाला गैंग , फिर बात बेबात पर अपने पुरस्कारों को वापस करने की धमकी देने वाला गुट और सार्वजनिक रूप से चिट्ठी लिखकर कर शासन और सरकार को देश विदेश में बदनाम करने की कोशिश करने वाले गैंग के टूल किट वालों से मिलने लगे हैं इसलिए अब अचानक ही इस देश में उन्हें गृहयुद्ध होता और उसमें 20 करोड़ मुस्लिम पूरे भारत के हिन्दुओं को पराजित करके गजवा ए हिन्द की स्थापना होती दिखाई दे रही है।  

ठीक ऐसी ही बात अभी दो दिन पहले , कट्टर मुस्लिम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी  भी एक जनसभा में व्यक्त कर रहे थे , मानो कह रहे हों कि -एक बार ये सरकार चली जाए फिर ,हिन्दुओं का सब कुछ चला जाएगा , छीन लिया जाएगा।  और तिस पर आलम ये कि -डरे हुए लोग हैं , इन्हें डराया जा रहा है। कुछ समय पहले ऐसे ही इस देश में रहने में डर लगने का कहने वाले आमिर खान अब अपनी पुत्री की हमउम्र युवती से तीसरी शादी करके अपना डर ख़त्म कर रहे हैं।

हिन्दू और हिंदुत्व को छोड़िए : कांग्रेस और कांग्रेसी का अंतर समझिये पप्पू जी

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यूँ तो कांग्रेस पार्टी अपने आप में ही इतनी आत्ममुग्ध रहती है कि उसे आज तक यही लग रहा है कि , भारत कांग्रेस के बिना कुछ नहीं है और कांग्रेस की सरकारों की बदौलत ही आज तक , यहाँ तक पहुँचा है।  इसलिए ही इनके सभी नेतृत्वकर्ता और राजनेता भी इस देश और इसके लोगों को आज तक अपनी बपौती समझते आए हैं।  पिछले एक दशक से बार बार बुरी तरह नकारे जाने के बावजूद कांग्रेस और उनके युवराज अभी भी इस देश को कांग्रेसी शब्दकोष से गढ़े गए नए शब्द और उनका अर्थ बता रहे हैं।

ये वही कांग्रेस है जिसने कुछ समय पहले तक -“भगवा आतंकवाद ” जैसा घृणित शब्द और पूरे सनातन और भगवा को बदनाम करने के लिए न सिर्फ गढ़ा बल्कि इसकी आड़ में येन केन प्रकारेण पूरे देश में हिन्दू साधू संतों और साध्वियों तक पर अमानवीय अत्याचार तक ढाए , उन पर मुक़दमे दर्ज़ करके उन्हें जेलों में डाल दिया।

अब जबकि कांग्रेस सत्ता से न सिर्फ बेदखल हो गई है बल्कि हिन्दुओं के प्रति अपना द्वेष और घृणा रखने ,जाहिर करने की मानसिकता के कारण अपने अस्तित्व से भी मिटने के कगार पर है इसके बावजूद भी कांग्रेस के शीर्ष नेता -राहुल गाँधी अपने नए शाब्दिक जाल -हिन्दू और हिंदुत्व -की आड़ में एक बार फिर से हिन्दुओं के प्रति अपनी घृणित और पूर्वाग्रह से ग्रस्त सोच को ज़ाहिर करते और फिर उसे कुतर्कों से उसे साबित करने लगते हैं।

असल में राहुल गाँधी को पहले -कांग्रेस और कांग्रेसी -का फर्क समझना चाहिए और खासकर वो अर्थ और अंतर जो इस देश की जनता अब खूब अच्छे से समझ गई है।

तिलक , पटेल , सुभाष आदि जैसे सभी क्रांतिकारी -कांग्रेस थे जबकि गाँधी ,जिन्ना ,नेहरू और इनके बाद इंदिरा से लेकर राजीव और राहुल प्रियंका तक सब के सब कांग्रेसी।

देश की राजनीति में अपना योगदान और सेवा देकर उसे आगे बढ़ाने वाले कार्य कांग्रेस के थे जबकि उन्हीं कार्यों की आड़ में , लाखों और करोड़ों का घोटाला करने वाले तमाम लोग कांग्रेसी थे।

गरीबी हटाओ का नारा देने वाली कांग्रेस थी जबकि इस देश को गरीब बनाए रखने वाले कांग्रेसी।  हमेशा ही हिन्दुओं से नफरत करने वाली , मुस्लिमों के लिये तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करने वाली कांग्रेस थी और चुनावों के समय मंदिर मंदिर भटकने , माथा टेकने , तिलक लगा कर नकली हिन्दू बनने वाले तमाम कांग्रेसी।

अपनी दल द्वारा शासित राज्यों में हो रहे भ्रष्टाचार , अपराध पर जो चुप्पी साध ले वो कांग्रेस और अन्य दलों द्वारा शासित राज्यों में इन्हीं सब बातों पर धरना , प्रदर्शन , आंदोलन , सड़क जाम करने वाले कांग्रेसी l

देश की सेना और जवानों की बातें करने वाली कांग्रेस और हर बार सेना का अपमान करने वाली , फौजियों को नीचा दिखाने ,चीन और पाकिस्तान की गोद में बैठ जाने वाले तमाम कांग्रेसी।

ये फेहरिश्त उतनी ही लम्बी है जितने कांग्रेस के कुकर्म , इसलिए राहुल गाँधी को तफ्सील से बैठ कर पहले “कांग्रेस और कांग्रेसी” का अर्थ और इन दोनों का ये अंतर अच्छी तरह समझने का प्रयास करना चाहिए अन्यथा वे जल्दी ही गाँधी जी के स्वप्न कि -कांग्रेस को पूरी तक ख़त्म कर दिया जाना चाहिए – को बहुत जल्दी ही पूरा कर देंगे।

 

कांग्रेस का महिला सशक्तिकरण अभियान शुरू: विधायक रमेश कुमार ने बलात्कार का आनंद लेने की बात और सिद्धू ने सरेआम दी माँ बहन की गाली

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कांग्रेस बेचारी जब भी ,चुनाव के लिए केंचुली ओढ़ कर ,अपने असली चरित्र को छिपाने की कोशिश करती है , कुछ ही समय में उनके अपने ही कारीगर उसका ऐसा चीथड़ा उड़ाते हैं कि बाद में पूरी पार्टी मिलकर भी रफू नहीं कर पाती।  कांग्रेस का असली चेहरा जो निहायत की कुरूप और बदरंग हो चुका है उस पर कालिख पोतने के लिए किसी भी बाहरी या विपक्षी की कोई जरूरत नहीं पड़ती , भाई बहन की जोड़ी और उनके पिछलग्गू नेता चमचे अपने “हाथ से ही अपनी पार्टी को स्वाहा” करने के लिए जो मुँह में आता है बोल कर निकल लेते हैं।  बाकी का जुलुस जनता अपने आप निकाल देती है।

अभी प्रियंका दीदी ने “लड़की हूँ , लड़ सकती हूँ ” का जोश भरा नारा देकर अपनी महिला सशक्तिकारण की मुहिम को शुरू ही किया था कि , कर्नाटक विधानसभा के उनके विद्वान विधायक ने “अगर बलात्कार होना ही है तो लेट कर उसका आनंद लेना चाहिए ” उस नारे में बारूद भर कर पलीता लगा दिया।  नतीजा हुआ कि आज उस लड़की को खुद की पार्टी के विधायक से ही लड़ना पड़ रहा है।

इतना ही होता तो भी बहुत था , इधर कर्नाटक में कांग्रेसी विधायक आनंद लेने वाला हाहाकारी बयान देकर खींसे निपोर रहे थे तो उधर पंजाब में कांग्रेस प्रमुख “नवजोत सिंह सिद्धू ” ने प्रेस वार्ता करते हुए इस बार ठोको ताली की जगह “ठोको माँ बहन की गाली ” वाला फार्मूला लगा दिया , जिसका नतीजा आने वाले दिनों में पंजाब में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सामने होगा।

आज कांग्रेस मानसिक रूप से दिवालियेपन के जिस कगार पर पहुँच गई है उससे सबको यकीन हो चला है कि , हो न हो , कांग्रेस के इन दोनों भाई बहन की जोड़ी और उनके बचे खुचे तमाम राजनेता जल्दी ही गाँधी जी कांग्रेस को पूरी तरह समाप्त करने के स्वप्न को जल्द से जल्द पूरा कर देंगे और देश को कांग्रेस मुक्त भारत भी शीघ्र ही देखने को मिल जाएगा।  जय हिन्द , जय भारत।

प्रधानमन्त्री मोदी से नफरत की इंतहा : किसी ने PM केयर्स फंड तो किसी ने वैक्सीन प्रमाणपत्र से PM की फोटो हटाने को दायर किया मुकदमा 

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दुनिया में शायद ही कोई ऐसा अभागा देश होगा जहाँ के कुछ लोग नफरत और द्वेष में अंधे होकर अपने ही प्रधानमंत्री की फोटो , चेहरे आदि को हटाने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने लगें।  प्रधानमंत्री मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और देश के प्रति उनकी निष्ठा ने बेशक आज दुनिया में भारत को विश्व के सबसे प्रभावशाली देशों में से एक बना दिया हो।  बेशक ही भारत जैसे विशाल जनसमूह वाले देश में एक नहीं दो दो बार प्रचंड बहुमत से उन्हें देश का नेतृत्वकर्ता चुना गया हो , मगर अपनी ही कुंठा और नफ़रत में जलते कुछ मुट्ठीभर लोगों को ये सब पसंद नहीं आ रहा है।

आज जहाँ , केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके , कोविड वैक्सीन प्रमाणपत्र के ऊपर प्रदर्शित , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को हटाने की माँग की गई है तो वहीँ , मुंबई उच्च न्यायालय में एक कांग्रेसी नेता द्वारा -PM केयर्स फंड के लोगो पर , प्रधानमंत्री की फोटो समेत राष्ट्रीय चिन्ह आदि को हटाए जाने हेतु भी एक याचिका दायर की गई है।

केरल उच्च न्यायलय ने , याची को लताड़ लगाते हुए पूछा कि -आखिर देश के ऐसे प्रधानमंत्री जिनपर देश सहित दुनिया को गर्व है -उनकी फोटो से याची को क्या कठिनाई है और वे जिस संस्थान से सम्बद्ध हैं उस संस्थान का नाम पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल के नाम पर है तो फिर उसे हटाने की माँग क्यों नहीं रखी ?? जबकि मुंबई उच्च न्यायालय ने दायर याचिका पर नोटिस जारी करके केंद्र सरकार से इस विषय पर उनका जवाब जानना चाहा है।

अब थोड़ी देर के लिए कल्पना करके देखिये कि , दशकों बाद भारत जैसे विकाशील देश के प्रधानमंत्री की शख्शियत और व्यक्तित्व से मोहित और प्रभावित होकर आज दुनिया का हर देश भारत का साथ और हाथ चाह रहा है , दुनिया के शक्तिशाली देशों के मुखिया तक प्रधानमंत्री मोदी से एक मुलाक़ात की प्रतीक्षा करते हैं -ऐसे में , खुद उनके अपने देश के कुछ लोग , राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में अंधे होकर इस तरह की उल जलूल हरकतें और व्यवहार कर रहे हैं।

असल में भारत को अपने खानदान की बपौती मानने वाले कुछ राजनेता और उनके चश्मोचराग़ों ने तो कुछ ऐसी नीति और नियम बना रखे थे जिससे सिर्फ और सिर्फ एक ही परिवार का नाम , फोटो , चेहरे , वक्तव्य ही पूरे देश में दिखाई सुनाई देते रहते थे।  ऐसे में इस परिपाटी को तोड़ कर , कभी शिवाजी , कभी पटेल , कभी सुभाष , और अब मोदी के चेहरे , कथन और कर्म से इन तमाम पिछलग्गुओं को बहुत तकलीफ हो रही है।