प्रधानमंत्री मोदी के मुंह से औरंगजेब का नाम सुनते ही मुगलों में बढ़ी बरनोल की बिक्री

 

प्रधानमंत्री मोदी के मुंह से औरंगजेब का नाम सुनते ही मुगलों में बढ़ी बरनोल की बिक्री

ये तो होना ही था और कहें कि ये तो होता ही है , जब भी प्रधानमंत्री मोदी सनातन से जुड़े किसी भी प्रतीक या स्थल पर पहुँचते हैं तो , कांगी वामी समेत तुष्टिकरण से अब तक , अपनी राजनीति की दुकान और धंधा चलाने वाले तमाम विपक्षी और उनके साथ साथ पूरी मुग़ल जमात जैसे गर्म तवे पर बैठ कर उछलने लगती है। और फिर जब अवसर हो बाबा विश्वनाथ भोला महादेव की नगरी काशी को दोबारा से भव्य और दिव्य बनाने के अपने संकल्प को पूरा करने के जयघोष की तो फिर तो कहना ही क्या।  विरोधी चारों तरफ सिर्फ बरनोल ही तलाशते फिर रहे हैं , और करें भी क्या ??

प्रधानमंत्री मोदी ने , इस बार न सिर्फ ,  मुगलों के अब्बू और दादू हज़ूर , औरंगजेब का नाम क्रूर आक्रमणकारी के रूप में लिया बल्कि सार्वजनिक रूप से यह भी उद्घोष कर दिया कि , जब जब इस देश पर कोई औरंगजेब अपनी कुत्सित नज़र और हैवानियत लिए खड़ा होगा उसके सामने छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा देश का कोई सपूत भी जरूर आएगा और उसके सारे घमंड का मर्दन करके रख देगा।

विपक्षी जो पिछले सात सालों से यूँ ही बौराए बौखलाए से घूम रहे हैं उनके नेतृत्वकर्ताओं को यही नहीं पता चल रहा है कि आखिर वे इन सब पर प्रतिक्रया दें भी तो कैसी प्रतिक्रया दें।  कल राहुल गाँधी “महंगाई हटाओ रैली ” में हिन्दू और हिंदुत्ववाद पर कांग्रेसी डिक्शनरी का भावार्थ समझा रहे थे तो आज अखिलेश झुंझलाते हुए – काशी बनारस को , अंतिम समय पर जाया जाने वाला स्थान बताकर , प्रधानमंत्री मोदी पर ताना मार रहे थे।

अगले कुछ महीनों में ही, अनेक राज्यों में होने वाली  विधानसभा चुनाव में अपनी संभावित हार के बाद फिर वही ईवीएम का रोना रोने के लिए पहले ही तैयार होते विपक्षी असल में अब अपने ही बुने जाल में फँसते नज़र आ रहे हैं।  हमेशा ही हिन्दुओं , सनातन , मंदिरों , नदियों की उपेक्षा करते हुए और तुष्टिकरण के सिद्धांत और फार्मूले को अचूक मान कर विशेष मज़हब और ख़ास जमात के साथ ही अपनी राजनैतिक साँठ गाँठ करते थे।

अब जबकि , मोदी सरकार एक एक करके , सनातन के सारे प्रतीक स्थलों , भगवान् राम , कृष्ण और आदि देव महादेव से जुड़े दिव्य स्थलों के जीर्णोद्धार करके , उनका पुनर्निमाण करके , उनका सौंदर्यीकरण करके , पूरी दुनिया में सनातन का डंका , सनातन का जय घोष फिर से स्थापित कर रहे हैं तो ऐसे में विपक्षियों को समझ ही नहीं आ रहा है कि वे किसके पक्ष में रहें और किसका विरोध करें।

सूत्रों की माने तो , अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा में भी कृष्ण जन्भूमि के पुनरुत्थान की दिशा में सरकार और सम्बंधित विभाग अग्रसर हो चुके हैं।  ज्ञात हो कि इस सम्बन्ध में पहले ही दायर याचिका में अदालत ने पुरातत्व विभाग को सारे साक्ष्य एकत्र करके रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दे दिया है।

जो भी हो , इतना तो तय है कि आने वाले समय में सनातन का ये जयघोष और अधिक प्रचंड और तीव्र होगा और देव कार्य में जो भी जहाँ भी जैसे भी बाधा बनेगा या डालेगा , काल स्वयं उसका सारा हिसाब किताब करेगा।  जय सनातन , जय हिन्दू धर्म।  जय हिन्द।

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