
इत्तिफाकन जब इधर उतर प्रदेश प्रशासन द्वारा , सावन कांवड़ यात्रा मात्र में पड़ने वाली सभी खाने पीने की दुकानों के दुकान , रेस्तरां ,होटल मालिकों को अपने अपने प्रतिष्ठानों दुकानों आदि पर अपनी स्पष्ट पहचान बताने विषयक आदेश पर खूब जम कर राजनीति और बहसबाजी की जा रही है यहां तक कि इसके विरूद्ध मामला माननीय सर्वोच्च अदालत में दाखिल भी कर दिया गया है।
लेकिन इस बीच सुदूर उत्तर पूर्व राज्य असम से भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है जो चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला यह है कि असम में एक व्यक्ति रकाबुद्दीन अहमद ने सोशल नेट्वर्किंग साइट पर अपना नाम “नीलाभ सौरभ ” रख कर एक प्रोफ़ाइल बनाई और वहां भगवान राम और सीता के ऊपर एक कविता लिख कर पोस्ट कर दी जिसमें आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया था।

रक़ीबुद्दीन के विरुद्ध विभिन्न कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज़ होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए रक़ीबुद्दीन ने अदालत के सामने खुद को मासूम बताते हुए गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत की गुहार लगाईं जिसे स्वीकार कर लिया गया है। कविता के बाबत रक़ीबुद्दीन का कहना है कि उसने राम और सीता नाम का उपयोग इसलिए किया क्यूंकि वे देश में लोकप्रिय नाम हैं।

मामला अदालत में विचाराधीन है और पुलिस द्वारा अनुसंधान भी जारी है इसलिए ऐसे में इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करना उचित नहीं हैं , किन्तु यदि नाम और काम में पारदर्शिता रहे तो फिर ऐसे बहुत से मामलों विवादों और मुकदमों से बचा जा सकता है।






