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बच्चों ने गलती की तो मिलेगी माँ बाप को सज़ा -चीन का नया कानून

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चीनी प्रशासन अपने नागरिकों को नियंत्रित करने के लिए , उनके क्रिया कलाप से लेकर सोच और विचारधारा तक को अपने काबू में रखने के लिए तरह तरह के अनोखे नए कानून बना कर उन्हें लागू करता रहता है।  हालाँकि इसके लिए कई बार चीनी सरकार को मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप झेलना पड़ा है किन्तु चीन है कि प्रयोगों से बाज नहीं आता।

चीन के नागरिक संस्कारों से सम्बंधित विधि में एक बहुत बड़ा प्रयोग किए जाने के समाचार पिछले दिनों प्रकाशित किए गए।  चीन में अब बच्चों द्वारा जानबूझ कर की गई , गलतियाँ , अपराध , बेअदबी ,आदि के लिए माता पिता को दण्डित किया जा सकेगा।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा प्रस्तावित इस क़ानून का उद्देश्य -आजकल के बच्चों में बढ़ती उदण्डता ,सामाजिक व राजनैतिक दायित्वों से भागना ,  मोबाईल गेमिंग और इंटरनेट की लत , आदि बहुत सी प्रवृत्तियों के तेज़ी से वृद्धि होने के कारण -इसके लिए कहीं न कहीं माँ पिता और उनकी परवरिश को जिम्मेदार मानते ठहराते हुए एक तरह से उन्हें चेतावनी दे दी है।

इस प्रस्तावित क़ानून में न सिर्फ , राष्ट्र , स्वजनों और सत्ताधीन पार्टी के प्रति प्रेम और निष्ठा बनाए रखने के लिए बच्चों को प्रेरित करने , श्रेष्ठ जनों का आकर और छोटों से स्नेह ,से लेकर टीवी और मोबाइल देखने तक के लिए अलग अलग तरह के प्रावधान और नियम रखे गए हैं।  इसका एक उद्देश्य माँ बाप को अपने बच्चों को समय देकर उनकी उचित परवरिश पर ध्यान दिलाने के लिए बाध्य करना भी है।  

ज्ञात हो कि , भारत में प्रति वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले सैकड़ों निर्दोष लोगों की मौत के जिम्मेदार वाहन चालकों को इसलिए सजा नहीं मिल पाती क्यूंकि दुर्घटना के समय वे नाबालिग होते हैं और उनके इस कृत्य के लिए उनके माँ पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा पाता है।

मदरसे में पढ़ाते तो नहीं बिगड़ता आर्यन : मौलाना शहाबुद्दीन

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जब आपका वक्त बुरा आता है तो फिर आपको रास्ते का कोई उठाईगीरा भी कोई सी उल जलूल सलाह देने लगता है ताकि आप पर रुकी हुई कृपा बरसने लगे।  आजकल सबसे ज्यादा गर्दिश में तो शाहरुख खान के सितारे ही चल रहे हैं।

पिछले साल सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में ड्रग्स के जाल और उसके शिकंजे में फँसा पूरा फ़िल्मी जगत , की सारी कहानी एक एक करके दुनिया के सामने आती चली गई।  रिया बनर्जी से शुरू हुई कहानी , कहाँ कहाँ से होते हुए अब शाहरुख खान के बेटे आर्यन और उसके दोस्तों के साथ क्रूज़ पर की गई रेव पार्टी में आर्यन की गिरफ्तारी पर आकर टिक गई है।  

आर्यन फिलहाल जेल में हैं और अपनी जमानत का इंतज़ार कर रहे हैं।  ऐसे में उनके अपनी कौम के मौलाना जी ने उन्हें और दूसरों को भी नसीहत दी है।  मौलाना जी कहना है कि शाहरुख यदि मदरसे में आर्यन को पढ़ने भेजते , मज़हब की तालीम और इल्म से तवारुफ़ करवाते तो आज शाहरुख को ये दिन नहीं देखने पड़ते।

 

बकौल मौलाना जी , मदरसे में पढ़ कर इंसान जहीन और सलीकेदार , खुदापसन्द और ईमान वाला बन जाता है।  मदरसे में सभी बुरी आदतों से छुटकारा भी दिलाया जाता है और जिंदगी की अच्छी अच्छी बातें भी सिखाई समझाई जाती हैं।

मगर शाहरुख भी क्या करें ??? देख ही रहे हैं कि अभी तो चलो स्कूल में पढ़ कर बेटा सिर्फ धुआँ उड़ाते हुए ही पकड़ा गया है कहीं यदि मदरसे में पढ़ने जाता और कल होकर कोई हवाई जहाज या कोई शहर उड़ाता मिलता तो फिर तो मौलाना जी की ताबीज टोटका भी कुछ नहीं कर पाता।  वल्लाह

राज कुंद्रा ने उनकी मासूम छवि को बदनाम करने के लिए शर्लिन चोपड़ा पर ठोंका 50 करोड़ की मानहानि का मुकदमा

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पूरी दुनिया को योगा सिखा कर स्वस्थ एवं चुस्त दुरुस्त रखने का युगांतकारी काम करने वाली अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के , बहुत धनाढ्य पति राज कुंद्रा को जब दो महीने पहले , मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था तो पुलिस को छः महीने पहले मॉडल शर्लिन चोपड़ा द्वारा पुलिस में कुंद्रा के विरूद्ध शोषण और यौन फिल्मों के अनैतिक व्यापार में लिप्त रहने के आरोप की जांच में उनके विरुद्ध साक्ष्य मिल गए थे।

इसका परिणाम ये हुआ की पुलिस ने न सिर्फ कुंद्रा को बल्कि अवैध यौन फिल्मों के इस कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जहां पूरे दो महीने रहने के बाद जैसे तैसे राज कुंद्रा को जमानत मिली है और वे जेल से बाहर आए हैं।  शिल्पा का इस बारे में कहना है कि उन्हें राज कुंद्रा के इस गंदे धंधे के बारे में कुछ पता नहीं था।

लेकिन जेल से बाहर आने के बाद राज कुंद्रा ने मोडल शर्लिन चोपड़ा के ऊपर उनकी छवि को खराब करके उनकी सामजिक प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाने के लिए पूरे 50 करोड़ रूपए की मानहानि का मुकदमा ठोंक दिया है।

इस बात की जानकारी देते हुए कुंद्रा की टीम ने उस नोटिस को भी मीडिया को जारी किया जो शर्लिन को जारी किया गया है।  इसमें शर्लिन पर राज कुंद्रा की छवि को ख़राब करने का आरोप लगाया गया है।

बात भी सही है , राज कुंद्रा जो भी करते रहे हों , उनकी पोल खोल कर सारा काला सच सामने लाकर एक बार फिर से बॉलीवुड की गंदगी का असली चेहरा सामने लाने की शर्लिन को भला क्या जरूरत थी।  अजी हाँ

अमृतसर के जामा मस्जिद (दरहगाह बाबा जहूर ) में धमाका

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प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब के अमृतसर के कत्थूनंगल नामक एक कसबे में दरगाह बाबा जहूर शाह की मस्जिद जिसे जामा मस्जिद भी कह कर पुकारते हैं , उसमें शनिवार रात को एक जोरदार धमका हुआ और उसके बाद आग लगने से अफरा तफरी मच गई।

आग लगने से पास के कमरे में ररखी हुई कुछ धार्मिक पुस्तकों के जलने के अलावा कुछ घरेलु सामान भी जल कर राख हो गया।  सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पहुंची और जांच शुरू की।  प्रारम्भिक जाँच में पुलिस ने इस शार्ट सर्किट का मामला बताया।

किन्तु जब घटनास्थल की बारीकी से जाँच की गई तो वहां पेट्रोल से भरी हुई बोतलें बरामद हुई।  इसके बाद पुलिस का मानना है कि आपस के कुछ गुंडा शरारती तत्वों ने माहौल को खराब करके क़ानून व्यवस्था की गड़बड़ी फैलाने के लिए ऐसा किया होगा।

चीन कर रहा उइगर मुस्लिमों पर अमानवीय अत्याचार : गुप्तांग में करंट ,  कोड़े मारना -चीनी पुलिस अधिकारी का खुलासा

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चीन उइगर मुस्लिमों के साथ पिछले कुछ दशकों से ही कितना अमानवीय व्यवहार कर रहा है इस बात की जानकारी पूरी दुनिया को ही है।  बार बार इस विषय पर अनेक तरह के समाचार ,खबरें ,और वीडिओज़ दुनिया के सामने लाए जाते रहे हैं जिनमे उइगर मुस्लिमों पर चीनी पुलिस एवं सेना द्वारा भयंकर यातना ढाई जा रही है।

पूरी दुनिया में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में सबसे बदनाम देश चीन , जहाँ एक तरफ अपनी विस्तारवादी नीति को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण एशिया क्षेत्र में अपनी मनमानी करने पर आमादा रहता है वहीँ दूसरी तरफ अपने ही देश के नागरिकों के साथ बहुत ही दोयम दर्ज़े का व्यवहार करता है।

अब चीन के एक पुलिस अधिकारी ने एक बार फिर से पूरी दुनिया के सामने स्वीकार किया है कि कैसे चीन में लाखों उइगर मुस्लिमों पर भयानक जुल्म ढाए जा रहे हैं।  उन्हें कई कई दिनों तक भूखा प्यासा रख कर कुर्सियों से बाँध दिया जाता है।  उन्हें कई दिनों तक सोने नहीं दिया जाता और ज़रा सी झपकी आने पर भयंकर यातनाएं दी जाती हैं।

पुलिस अधिकारी जियांग जो कई वर्षों तक चीन की पुलिस सेवा में थे उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि , चीन में छोटे छोटे अपराध में भी उइगरों को पकड़ कर लम्बे समय के लिए जेल में डाल कर घोर यातनाएं दी जाती हैं।  महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा जाता।  और तो और बहुतों के गुप्तागों पर करंट लगाया जाता है और कोड़े बरसाए जाते हैं।

हैरानी और दुःख की बात ये है कि पूरी दुनिया में 56 मुल्क होने का दावा करने वाले , पूरी दुनिया को अपनी मज़हबी कट्टरता से डरा धमका कर रखने वाले तमाम मुस्लिम देश और उनके रहनुमाओं ने जाने किन कारण से चीन के इन बदनसीब मुस्लिमों को यूँ नर्क की तरह जीने मरने के लिए छोड़ दिया है।  और तो और चीनी सरकार के आदेश पर उइगरों की बस्ती और उनके कब्रिस्तान तक खोद डाले गए हैं।  

मिलिए हमारे पूर्वज :हमारे ऋषियों से

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सत्य कहा है  किसी ने यदि , भारत के लोग सिर्फ अपने शाश्वत सत्य सनातन से सच्चे रूप से परिचित हो जाएं ,उन्हें उसका ज्ञान हो जाए तो वे स्वयं ही समर्थ और शक्तिवान हो उठेंगे।  आइये आज जानते हैं हम अपने पूर्वजों अपने ऋषि मुनियों के विषय में :-

कौन से ऋषि का क्या है महत्व??????

ऋषि भारतीय परंपरा में श्रुति ग्रंथों को दर्शन करने (यानि यथावत समझ पाने) वाले जनों को कहा जाता है। आधुनिक बातचीत में मुनि, योगी(जोगी) , सन्त अथवा कवि इनके पर्याय नाम हैं। ऋषि शब्द की व्युत्पत्ति ‘ऋष’ है जिसका अर्थ देखना होता है। ऋषि के प्रकाशित कृतियों को आर्ष कहते हैं जो इसी मूल से बना है, इसके अतिरिक्त दृष्टि (नज़र) जैसे शब्द भी इसी मूल से हैं। सप्तर्षि आकाश में हैं और हमारे कपाल में भी।

अंगिरा ऋषि – ऋग्वेद के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी।

विश्वामित्र ऋषि – गायत्री मंत्र का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र की परंपरा पर चलने वाले ऋषियों ने उनके नाम को धारण किया। यह परंपरा अन्य ऋषियों के साथ भी चलती रही।

वशिष्ठ ऋषि – ऋग्वेद के मंत्रद्रष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक वशिष्ठ सप्तऋषियों में से एक थे। उनकी पत्नी अरुंधती वैदिक कर्मो में उनकी सहभागी थीं।

*कश्यप ऋषि : – मारीच ऋषि के पुत्र और आर्य नरेश दक्ष की १३ कन्याओं के पुत्र थे। स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, इनसे देव, असुर और नागों की उत्पत्ति हुई।

जमदग्नि ऋषि – भृगुपुत्र यमदग्नि ने गोवंश की रक्षा पर ऋग्वेद के १६ मंत्रों की रचना की है। केदारखंड के अनुसार, वे आयुर्वेद और चिकित्साशास्त्र के भी विद्वान थे।

अत्रि ऋषि – सप्तर्षियों में एक ऋषि अत्रि ऋग्वेद के पांचवें मंडल के अधिकांश सूत्रों के ऋषि थे। वे चंद्रवंश के प्रवर्तक थे। महर्षि अत्रि आयुर्वेद के आचार्य भी थे।

अपाला ऋषि -अत्रि एवं अनुसुइया के द्वारा अपाला एवं पुनर्वसु का जन्म हुआ। अपाला द्वारा ऋग्वेद के सूक्त की रचना की गई। पुनर्वसु भी आयुर्वेद के प्रसिद्ध आचार्य हुए।

नर और नारायण ऋषि -ऋग्वेद के मंत्र द्रष्टा ये ऋषि धर्म और मातामूर्ति देवी के पुत्र थे। नर और नारायण दोनों भागवत धर्म तथा नारायण धर्म के मूल प्रवर्तक थे।

पराशर ऋषि -ऋषि वशिष्ठ के पुत्र पराशर कहलाए, जो पिता के साथ हिमालय में वेदमंत्रों के द्रष्टा बने। ये महर्षि व्यास के पिता थे।

भारद्वाज ऋषि -बृहस्पति के पुत्र भारद्वाज ने ‘यंत्र सर्वस्व’ नामक ग्रंथ की रचना की थी, जिसमें विमानों के निर्माण, प्रयोग एवं संचालन के संबंध में विस्तारपूर्वक वर्णन है। ये आयुर्वेद के ऋषि थे तथा धन्वंतरि इनके शिष्य थे।

आकाश में सात तारों का एक मंडल नजर आता है उन्हें सप्तर्षियों का मंडल कहा जाता है। उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान सात संतों के आधार पर ही रखे गए हैं। वेदों में उक्त मंडल की स्थिति, गति, दूरी और विस्तार की विस्तृत चर्चा मिलती है। प्रत्येक मनवंतर में सात सात ऋषि हुए हैं। यहां प्रस्तुत है वैवस्तवत मनु के काल में जन्में सात महान ‍ऋषियों का संक्षिप्त परिचय।

वेदों के रचयिता ऋषि – ऋग्वेद में लगभग एक हजार सूक्त हैं, लगभग दस हजार मन्त्र हैं। चारों वेदों में करीब बीस हजार हैं और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते हैं। बाकी तीन वेदों के मन्त्रों की तरह ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना में भी अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है। पर इनमें भी सात ऋषि ऐसे हैं जिनके कुलों में मन्त्र रचयिता ऋषियों की एक लम्बी परम्परा रही। ये कुल परंपरा ऋग्वेद के सूक्त दस मंडलों में संग्रहित हैं और इनमें दो से सात यानी छह मंडल ऐसे हैं जिन्हें हम परम्परा से वंशमंडल कहते हैं क्योंकि इनमें छह ऋषिकुलों के ऋषियों के मन्त्र इकट्ठा कर दिए गए हैं।

वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम क्रमश: इस प्रकार है:- १.वशिष्ठ, २.विश्वामित्र, ३.कण्व, ४.भारद्वाज, ५.अत्रि, ६.वामदेव और ७.शौनक।
पुराणों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न-भिन्न नामावली मिलती है।

विष्णु पुराण अनुसार इस मन्वन्तर के सप्तऋषि इस प्रकार है :-
वशिष्ठकाश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत।
विश्वामित्रभारद्वजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।।
अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार हैं:- वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज।

इसके अलावा पुराणों की अन्य नामावली इस प्रकार है:- ये क्रमशः केतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वशिष्ट तथा मारीचि है।

महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती हैं। एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते हैं तो दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते हैं। कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते हैं पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते हैं। कुछ पुराणों में कश्यप और मरीचि को एक माना गया है तो कहीं कश्यप और कण्व को पर्यायवाची माना गया है। यहां प्रस्तुत है वैदिक नामावली अनुसार सप्तऋषियों का परिचय।

१. वशिष्ठ -राजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ को कौन नहीं जानता। ये दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था। कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था। वशिष्ठ ने राजसत्ता पर अंकुश का विचार दिया तो उन्हीं के कुल के मैत्रावरूण वशिष्ठ ने सरस्वती नदी के किनारे सौ सूक्त एक साथ रचकर नया इतिहास बनाया।

२. विश्वामित्र -ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। इस तरह ऋषि विश्वामित्र के असंख्य किस्से हैं।

माना जाता है कि हरिद्वार में आज जहां शांतिकुंज हैं उसी स्थान पर विश्वामित्र ने घोर तपस्या करके इंद्र से रुष्ठ होकर एक अलग ही स्वर्ग लोक की रचना कर दी थी। विश्वामित्र ने इस देश को ऋचा बनाने की विद्या दी और गायत्री मन्त्र की रचना की जो भारत के हृदय में और जिह्ना पर हजारों सालों से आज तक अनवरत निवास कर रहा है।

३. कण्व -माना जाता है इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।

४. भारद्वाज -वैदिक ऋषियों में भारद्वाज-ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थीं। भारद्वाज ऋषि राम के पूर्व हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार उनकी लंबी आयु का पता चलता है कि वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का सन्धिकाल था। माना जाता है कि भरद्वाजों में से एक भारद्वाज विदथ ने दुष्यन्त पुत्र भरत का उत्तराधिकारी बन राजकाज करते हुए मन्त्र रचना जारी रखी।

ऋषि भारद्वाज के पुत्रों में १० ऋषि ऋग्वेद के मन्त्रदृष्टा हैं और एक पुत्री जिसका नाम ‘रात्रि’ था, वह भी रात्रि सूक्त की मन्त्रदृष्टा मानी गई हैं। ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि हैं। इस मण्डल में भारद्वाज के ७६५ मन्त्र हैं। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के २३ मन्त्र मिलते हैं।

‘भारद्वाज-स्मृति’ एवं ‘भारद्वाज-संहिता’ के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे। ऋषि भारद्वाज ने ‘यन्त्र-सर्वस्व’ नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने ‘विमान-शास्त्र’ के नाम से प्रकाशित कराया है। इस ग्रन्थ में उच्च और निम्न स्तर पर विचरने वाले विमानों के लिए विविध धातुओं के निर्माण का वर्णन मिलता है।

५. अत्रि – ऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव अनसूया के घर ब्राह्मण के भेष में भिक्षा मांगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था।

अत्रि ऋषि ने इस देश में कृषि के विकास में पृथु और ऋषभ की तरह योगदान दिया था। अत्रि लोग ही सिन्धु पार करके पारस (आज का ईरान) चले गए थे, जहां उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ। अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। मान्यता है कि अत्रि-दम्पति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में जन्मे। ऋषि अत्रि पर अश्विनीकुमारों की भी कृपा थी।

६. वामदेव -वामदेव ने इस देश को सामगान (अर्थात् संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं।

७. शौनक -शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया और किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया। वैदिक आचार्य और ऋषि जो शुनक ऋषि के पुत्र थे।

फिर से बताएं तो वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भरद्वाज, अत्रि, वामदेव और शौनक- ये हैं वे सात ऋषि जिन्होंने इस देश को इतना कुछ दे डाला कि कृतज्ञ देश ने इन्हें आकाश के तारामंडल में बिठाकर एक ऐसा अमरत्व दे दिया कि सप्तर्षि शब्द सुनते ही हमारी कल्पना आकाश के तारामंडलों पर टिक जाती है।

इसके अलावा मान्यता हैं कि अगस्त्य, कष्यप, अष्टावक्र, याज्ञवल्क्य, कात्यायन, ऐतरेय, कपिल, जेमिनी, गौतम आदि सभी ऋषि उक्त सात ऋषियों के कुल के होने के कारण इन्हें भी वही स्थान प्राप्त है।

ये उन दिनों की बात थी -यादों के एलबम से

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शिक्षकों के लिए कक्षा में दो ही विद्यार्थी पसंदीदा होते हैं अक्सर , एक वो जो खूब पढ़ते लिखते हैं और हर पीरियड में सावधान होकर एकाग्र होकर उन शिक्षकों की बात सुनते समझते हैं और फिर परीक्षा के दिनों में उनके तैयार प्रश्नपत्रों को बड़ी ही मेहनत से हल कर अच्छे अंकों से पास होते हैं | ये वाले बच्चे कक्षा दर कक्षा शिक्षकों के प्रिय और सर्व प्रिय हो जाते हैं |

इनके अलावा एक दूसरे होते हैं वो जो किसी खेल कूद में ,किसी अन्य विधा जैसे चित्र कला संगीत वाद्य आदि में निपुण होते हैं वे भी कक्षा के अलावा पूरे स्कूल के भी प्यारे होते हैं | पहले वालों का खेल कूद आदि में बहुत कुछ न कर पाना माफ़ होता है और दूसरों वालों का पढ़ाई लिखाई में चलताऊ होना |

इनके अलावा जो तीसरे प्रकार के होते हैं जिनकी संख्या दोनों वाली श्रेणी से अधिक होती है वे भी प्यारे होते हैं मगर एक दूसरे के | मगर कभी कभी कोई शिक्षक या शिक्षिका अपने अलग अंदाज़ के कारण अलग ही बच्चों को अपना प्रिय बना लेते हैं और उससे अधिक वो उन बच्चों के प्रिय हो जाते हैं |

ऐसी ही थीं हमारी आठवी कक्षा की एडगर मैम , उनका नाम क्या था न उस समय पता था न ही आज तक पता चला | मगर अंग्रेजी भाषा के कमज़ोर विद्यार्थी उन्हें डर के मारे अजगर मैम कह कर पुकारते थे | कक्षा आठ में पहला परिचय और पहला ही पीरियड इस अंगरेजी और एडगर मैम से हुआ | हमारा और उसमें भी मेरा विशेष रूप से इसलिए हुआ कि उन बच्चों ,जो कक्षा में जोर जोर से पढ़ने के डर के मारे पसीने पसीने हो जाते थे ,उन बच्चों में से एक बच्चा मैं भी था |

पहला सबक मिला एक डिक्शनरी खरीद कर अगले दिन से कक्षा में लाने का आदेश (डिक्शनरी अब तक मेरे पास है ,और अंग्रेजी से अंग्रेजी भाषा के शब्दार्थ वाली है ) फिर उसके बाद तो शायद ही कोई पीरियड ऐसा गुजरता हो जब बीच कक्षा में खड़े होकर ,जहाँ से मुझ से पहले वाले सहपाठी ने ख़त्म की वहीं से , पाठ को जोर जोर से पढ़ने का अनवरत अभ्यास |

पहले पहल बड़े अक्षरों को एक बार में भी न पढ़ पाने ,उच्चारण का पूरा क्रिया कर्म कर डालने के कारण मनोरंजन का पात्र बने हम कब धीरे धीरे अंग्रेजी पढ़ने समझने और उसे बेहतर करने में पारंगत हुए पता ही नहीं चला | दसवीं कक्षा में आकर भी अंग्रेजी ने नहीं डराया जो हलकान किया वो कम्बख्त गणित ने ही किया |

असली कमाल तो शुरू हुआ कक्षा 11वीं में जहां इस गणित विज्ञान के चक्रव्यूह से निकल कर अपने पसंदीदा विषयों हिंदी अंग्रेजी इतिहास अर्थशास्त्र राजनीतिशास्र व मनोविज्ञान जैसे विषयों को पढ़ने समझने का मौक़ा मिला |

ये एडगर मैम द्वारा पढ़ाए गए और उससे अधिक उनके द्वारा जगाए आत्मविश्वास का ही परिणाम था कि मेरे जैसा विद्यार्थी स्नातक में अँग्रेजी प्रतिष्ठा के साथ अपने महाविद्यालय में दूसरे स्थान पर उत्तीर्ण हो सका | आज भी मन ही मन मैं उनको बार बार प्रणाम करता हूँ और शायद ही कोई दिन जाता हो जब मैं उन्हें न याद करता होऊं | बच्चों को अपनी आठवीं कक्षा की वो डिक्शनरी दिखाते ही उनकी प्रतिक्रया देखने लायक होती है |

ये उन दिनों की बात थी

सलमान खान ने कमाल खान को भेजा मानहानि का नोटिस : के आर के ने फ़िल्म राधे को बताया था घटिया

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अभी हाल ही में जी फाईव पर प्रदर्शित , सलमान खान की पिक्चर राधे बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुए है और तमाम आलोचक इस फिल्म की और सलमान की बार बार एक जैसे ही किए जाने वाले फूहड़ अभिनय के कारण उसे और फिल्म को निशाने पर लिए हुए हैं।  अभी कुछ दिनों पूर्व ही आलोचकों ने इसे सलमान की सबसे निम्न दर्ज़े की पिक्चर करार देते हुए एक रेटिंग से नवाज़ा था।

अब इसी क्रम में नया नाम जुड़ गया है -अपने यू ट्यूब चैनल पर फिल्मों की समीक्षा करके अक्सर विवादों में रखने वाले कमाल आर खान का।  ज्ञात हो कि कमाल खान अपने बद्तमीज़ लहज़े और बेहूदा टिप्पणियों के कारण पहले भी कई बार अनेक फ़िल्मी हस्तियों के निशाने पर आते रहे हैं मगर अपने यू ट्यूब चैनल पर वो नई फिल्मों और अभिनेता अभिनेत्रियों की समीक्षा के बहाने खूब कटाक्ष करते रहे हैं।  इस बार भी उन्होंने सलमान अभिनीत मूवी राधे को बकवास बताते हुए सलमान खान को अच्छी पिक्चर बनाने की सलाह दे डाली।  अब सलमान भाई और उनकी टीम के लिए ये नाकाबिले बर्दाश्त बात थी।  सो आनन फानन में कमाल खान को मानहानि का नोटिस भेज  दिया गया है जिसकी जानकारी खुद कमाल खान ने अपने ट्विट्टर हैंडल पर दी।

 

कमाल खान ने इस ट्वीट में भी सलमान को उन्हें नोटिस देने की बजाय अच्छी पिक्चरें बनाने की सलाह दी है और कहा कि वे फिल्मों की समीक्षा अपने फैंस के लिए करते है और आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे।

ज्ञात हो कि , अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की सन्देहासपद मौत के बाद से बॉलीवुड के सितारे गर्दिश में हैं और पिछले एक साल में एक के बाद एक आने वाली तमाम पिक्चरों को जनता बुरी तरह से नकार रही है।

लालकिले पर ट्रैक्टर स्टंट,धरना स्थल पर बलात्कार -तभी मनाना चाहिए था काला दिवस

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इस देश का हाल अजब गजब है , क्यूंकि दुनिया में ये इकलौता अकेला ऐसा देश जहां कोरोना महामारी के कारण लाखों जानों पर प्राणघातक संकट छाया हुआ है , सरकार प्रशासन , अस्पताल डाक्टर पुलिस और खुद आम लोग भी इससे उबरने के लिए दिन रात संघर्ष कर रहे हैं , लड़ रहे हैं और दूसरी तरफ कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ , राजनीति और पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर ऐसे ही दिन रात , षड्यंत्र रच रहे हैं , चिकित्स्कीय साधनों और संसाधनों की कालाबाज़ारी कर रहे हैं और छद्द्म आंदोलन/प्रदर्शन कर रहे हैं।

सरकार द्वारा किसान बिल में संशोधन के विरोध में , कांग्रेस और भाजपा विरोधी सरकारों की सरपरस्ती और उकसावे में किसानों के नाम पर पिछले कुछ महीनों से राजधानी दिल्ली और उसके आसपास जो भी कुछ किया जा रहा है /किया गया है उससे भी मन नहीं भरा तो रह रह के कुछ दिनों के बाद कुछ न कुछ नया शिगूफा छोड़ दिया जाता है।  इस किसान आंदोलन के तथाकथित अगुआ और नेता जो न तो सरकार से एक दर्जन बार बैठक करने के बाद कोई हल निकास सके और न ही खुद किसी नतीजे पर पहुंचे।

और तो और इस आंदोलन के नाम पर प्रत्यक्षतः अब तक इस धरने में शामिल कई वृद्ध , बीमार लोगों की मौत , लालकिले पर देश को शर्मसार करने वाला टैक्टर स्टंट , पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले और आख़िरकार प्रदर्शन स्थल पर सामूहिक बलात्कार और ह्त्या जैसे जघन्य अपराधों को कारित करने के बावजूद अब कल यानि 26 मई को काला दिवस मनाने की तैयारी में हैं और इसकी घोषणा भी कर चुके हैं।

सवाल ये है कि जब पहले ही दिन से अपने कुकर्मों और अपराधों के कारण लगातार मुँह काला करवा ही रहे हैं तो फिर काला दिवस मनाने के लिए इतना इंतज़ार क्यों ?? इन्हें तो पहले भी अनेकों बार ऐसे अवसर मिले हैं जहाँ पर अपना काला मुँह , काली नीयत , और काली नज़र के साथ ये काला दिवस मना सकते थे।  खैर देर आयद दुरुस्त आयद।  वैसे भी जैसे सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है वैसे ही काली आत्मा वालों को भी सब काला ही काला दिखता है -कानून काला , विरोध करने के लिए ध्वज काला और अब दिवस भी काला।  

कोरोना के महाविनाश में इन कारणों की हुई अनदेखी

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कोरोना महामारी का अचानक से बढ़ कर इतना विकराल रूप ले लेना और इतनी भयंकर तबाही मचा देने के अनेकों कारण ऐसे भी रहे जो पार्श्व में चले गए , आइए देखते हैं उनमें से कुछ को

नशे/मद्य /आदि का सेवन :- याद करिए वो दृश्य जब देशबन्दी में पूरे देश की जो जनता रामायण देख कर लहालोट हुई जा रही थी , भक्ति से ओतप्रोत थी , , देशबन्दी खुलते ही शराब की दुकानों पर महाभारत मचा रही थी।  अब एक दुसरा तथ्य भी जानिए कि इस कोरोना काल में भी पूरे देश के अलग अलग राज्यों की पुलिस ने पिछले एक वर्ष में 21  लाख करोड़ रुपये  के मूल्य की नशे की खेप ज़ब्त की है जो पकड़ में नहीं वो अलग हैं।  अब सोच के देखिये कि जो देश , समाज , नशे के जाल में पहले ही खुद को खाली और खोखला किए बैठा है उसका ऐसी महामारी में ये हश्र न हो तो क्या हो ??

इस देश के शीर्ष से लेकर निम्न स्तर तक जनसंख्या का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी रहा है जिसने कभी इस बीमारी की भयावहता को गंभीरता से लिया यही नहीं।  सत्ता से लेकर समाज तक और परिवार से लेकर व्यक्ति तक जिसे जहां अवसर मिला उसने कोरोना को धोखा देने की जुगत में अपने और अपनों को ही धोखा दिया।  चुनाव , रैलियाँ , प्रदर्शन , आंदोलन , आयोजन क्या ही छोड़ा गया और क्या ही नहीं किया गया ??

इस महामारी में सबसे अधिक घृणित बात ये हुई कि शहरों का समाज जो दिनों दिन मृत प्रायः होता जा रहा था इस बार उसकी मृत देह से वो दुर्गन्ध उठी कि इंसान का सारा काला सच नग्न होकर अपनी पूरी कुरूपता से सबके सामने उघड़ गया।  अस्पातलाल से लेकर शमशान तक , कोई पीड़ित की देह नोंच रहा था तो कोई कफ़न। उफ़्फ़ ! इन समाचारों ने /घटाओं ने खुद समाज को जो घाव दिए उसने उसे तिल तिल कर मारा।  

जो लोग बीमारी को ही कभी गंभीरता से नहीं ले रहे थे /हैं जो मास्क , सेनेटाइजर ,सामाजिक दूरी तक जैसी बातें नहीं समझ पाए/नहीं समझ रहे हैं उनसे रेमडीसीवार , ऑक्सीजन लेवल , प्रोन पोजीशन आदि की समझ पाने की अपेक्षा करना ही बेमानी है और इसका दुष्परिणाम सामने है ही।

ये देश समाज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि इस देश को खोखला करने वाले /बर्बाद करने वाले शत्रु/विरोधी/षड्यंत्रकारी सभी इस देश के अंदर ही मिल जाते हैं इसलिए इसे बाहरी दुश्मनों की जरूरत ही कहाँ पड़ती है।  तमाम विपक्षी/विरोधी एक भी रचनात्मक काम न करें , सहयोग न दें , सब चलता है किन्तु ऐसे समय में साज़िश रच कर देश समाज में जहर घोलने का घिनौना खेल खेलना आत्मघाती साबित हुआ है।

समय तो ये भी बीत ही जाएगा लेकिन इस विपत्ति काल में भारत में जो भी , जैसा भी हुआ /किया गया /कराया गया वो अगले बहुत सालों तक देश समाज की आत्मा को कचोटता रहेगा।