गर्मियों में अपने पौधों को ऐसे बचा सकते हैं आप _बागवानी मन्त्र

#बागवानीमन्त्र
जुलाई से पहले या कहें किः ग्रीष्म ऋतू के ढलने तक और वर्षा ऋतु के आगमन तक बागवानी शुरू करने के इच्छुक तमाम मित्रों को जरूर रुकना चाहिए। विशेषकर वे जो मैदानी क्षेत्रों में और छत /बालकनी ,प्रांगण में गमलों में बागवानी करना चाहते हैं।

बागवानी कर रहे वे मित्र जो छतों बालकनी में पौधे लगाए हुए हैं उनके लिए ये समय है अपने गमलों के स्थान को बदलने का। बहुत तेज़ तीखी धूप पूरे दिन न पड़ती रहे , बस उसका विकल्प तलाशना है। सीढ़ियों , कमरों ,छाएदार कोनों जहां जिसे रखा जा सके उसे वहां रखना ही ठीक रहता है।

जितना अधिक संभव हो सके पौधों को एक दूसरे के नज़दीक चिपका चिपका कर रखना गर्मियों में पौधों के लिए लाभदायी और सुरक्षित हो जाता है। एक दूसरे की ओट में न सिर्फ उनकी जड़ों में नमीं बनी रहती है बल्कि वाष्पीकरण से हवा में उत्पन्न नमी भी सभी को मिल जाती है। बड़े पौधों की छाया छोटों को मिल जाती है वो अलग।

गर्मियों में बेलदार पौधे लगाने का दोहरा लाभ होता है , एक इसकी जड़ों में व्याप्त नमी ही इनके पोषण और अच्छी धूप इनके विकास के लिए अनिवार्य होता है इसलिए अपेक्षाकृत ग्रीष्मकाल के लिए सर्वथा अनुकूल , घीया , तोरी , करेला , सीताफल , खीरा , फूलों में अपराजिता , मधुमालती , आदि। बेलों के पत्तों में जल की प्रचुरता होने के कारण नीचे तथा उनके आसपास का स्थान यहां तक की दीवारों तक पर वे नमी छोटे हैं। इससे आसपास के पौधों को हवा में जरुरी नमी मिलती रहती है।

#जड़ों में नमी बनाए उपाय -देखिये भयंकर गर्मी में गमलों के पौधों को छत बालकनी में ही रखे रहने के बावजूद भी झुलसने , मरने से बचाने के लिए ,स अबसे बड़ा नियम है , जितनी बार डाल सकते हैं उतनी बार पानी डालें , नमी बनी रहे और जड़ों की मिट्टी गीली रहे।

अब इसके लिए आप खुद तत्पर होते हैं , समय निकाल पाते हैं कई तरह के उपलब्ध जुगाड़/तकनीक में से कोई अपना लेते हैं ,करते हैं ये जरूर मायने रखता है। सबसे सरल होता है ये कि पौधों की जड़ों में पत्तों की एक ऎसी तह बिछा कर रखना जो गमले में डाले गए पानी के वाष्पीकरण की रफ़्तार को बहुत धीमा कर दे।

तीन दिन में एक बार पौधों की जड़ों में खूब सारा यानी एक ही दो राउंड या तीन भी , जब तक गमले में मिट्टी पानी को तुरंत सोखना न बंद कर दे या कहा जाए की मिट्टी संतृप्त हो जाए तब तक पानी डालना ठीक रहता है।

सुबह धूप के तेज़ होने से पहले और शाम को तपिश कम होने तक का समय पौधों को सींचने के लिए सर्वथा उत्तम माना गया है। गर्मियों में कई बार तो मैं देर रात भी पौधों में पानी डालता हूँ।

गर्मियों में नए प्रयोग वाली बागवानी से यथासंभव बचा जाना चाहिए और कृत्रिम उर्वरक का प्रयोग बिलकुल नहीं करना ही श्रेयस्कर होता है। कई बार रसायनों की उच्च प्रतिक्रया पौधे पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़ देती है।

एक आखरी बात , किती ही कोशिशों के बावजूद भी पौधे ख़त्म हो जाते हैं तो आने वाली बारिशों में उस गमले में कोई दूसरा जादू उगाने का अवसर मिलने जा रहा है आपको , बागवानी करने वालों को हमेशा यही सोचना चाहिए।

 

 

ताज़ा पोस्ट

ये उन दिनों की बात थी -यादों के एलबम से

शिक्षकों के लिए कक्षा में दो ही विद्यार्थी पसंदीदा होते हैं अक्सर , एक वो जो खूब पढ़ते लिखते हैं और हर पीरियड में...

सलमान खान ने कमाल खान को भेजा मानहानि का नोटिस : के आर के ने फ़िल्म राधे को बताया था घटिया

अभी हाल ही में जी फाईव पर प्रदर्शित , सलमान खान की पिक्चर राधे बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुए है और तमाम आलोचक...

लालकिले पर ट्रैक्टर स्टंट,धरना स्थल पर बलात्कार -तभी मनाना चाहिए था काला दिवस

इस देश का हाल अजब गजब है , क्यूंकि दुनिया में ये इकलौता अकेला ऐसा देश जहां कोरोना महामारी के कारण लाखों जानों पर...

कोरोना के महाविनाश में इन कारणों की हुई अनदेखी

कोरोना महामारी का अचानक से बढ़ कर इतना विकराल रूप ले लेना और इतनी भयंकर तबाही मचा देने के अनेकों कारण ऐसे भी रहे...

वैक्सीन कंपनियों ने वैक्सीन बेचने के लिए केजरीवाल के सामने रखी थी ये शर्मनाक शर्त

#खड़ीखबर : हमें वैक्सीन खरीदनी है आपसे : सड़ जी लेकिन हमारी एक शर्त है , आप अगले 24 घंटे तक प्रचार करने टीवी रेडियो...

यह भी पसंद आयेंगे आपको -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

ई-मेल के जरिये जुड़िये हमसे