प्रधानमन्त्री मोदी से नफरत की इंतहा : किसी ने PM केयर्स फंड तो किसी ने वैक्सीन प्रमाणपत्र से PM की फोटो हटाने को दायर किया मुकदमा 

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा अभागा देश होगा जहाँ के कुछ लोग नफरत और द्वेष में अंधे होकर अपने ही प्रधानमंत्री की फोटो , चेहरे आदि को हटाने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने लगें।  प्रधानमंत्री मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और देश के प्रति उनकी निष्ठा ने बेशक आज दुनिया में भारत को विश्व के सबसे प्रभावशाली देशों में से एक बना दिया हो।  बेशक ही भारत जैसे विशाल जनसमूह वाले देश में एक नहीं दो दो बार प्रचंड बहुमत से उन्हें देश का नेतृत्वकर्ता चुना गया हो , मगर अपनी ही कुंठा और नफ़रत में जलते कुछ मुट्ठीभर लोगों को ये सब पसंद नहीं आ रहा है।

आज जहाँ , केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके , कोविड वैक्सीन प्रमाणपत्र के ऊपर प्रदर्शित , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को हटाने की माँग की गई है तो वहीँ , मुंबई उच्च न्यायालय में एक कांग्रेसी नेता द्वारा -PM केयर्स फंड के लोगो पर , प्रधानमंत्री की फोटो समेत राष्ट्रीय चिन्ह आदि को हटाए जाने हेतु भी एक याचिका दायर की गई है।

केरल उच्च न्यायलय ने , याची को लताड़ लगाते हुए पूछा कि -आखिर देश के ऐसे प्रधानमंत्री जिनपर देश सहित दुनिया को गर्व है -उनकी फोटो से याची को क्या कठिनाई है और वे जिस संस्थान से सम्बद्ध हैं उस संस्थान का नाम पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल के नाम पर है तो फिर उसे हटाने की माँग क्यों नहीं रखी ?? जबकि मुंबई उच्च न्यायालय ने दायर याचिका पर नोटिस जारी करके केंद्र सरकार से इस विषय पर उनका जवाब जानना चाहा है।

अब थोड़ी देर के लिए कल्पना करके देखिये कि , दशकों बाद भारत जैसे विकाशील देश के प्रधानमंत्री की शख्शियत और व्यक्तित्व से मोहित और प्रभावित होकर आज दुनिया का हर देश भारत का साथ और हाथ चाह रहा है , दुनिया के शक्तिशाली देशों के मुखिया तक प्रधानमंत्री मोदी से एक मुलाक़ात की प्रतीक्षा करते हैं -ऐसे में , खुद उनके अपने देश के कुछ लोग , राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में अंधे होकर इस तरह की उल जलूल हरकतें और व्यवहार कर रहे हैं।

असल में भारत को अपने खानदान की बपौती मानने वाले कुछ राजनेता और उनके चश्मोचराग़ों ने तो कुछ ऐसी नीति और नियम बना रखे थे जिससे सिर्फ और सिर्फ एक ही परिवार का नाम , फोटो , चेहरे , वक्तव्य ही पूरे देश में दिखाई सुनाई देते रहते थे।  ऐसे में इस परिपाटी को तोड़ कर , कभी शिवाजी , कभी पटेल , कभी सुभाष , और अब मोदी के चेहरे , कथन और कर्म से इन तमाम पिछलग्गुओं को बहुत तकलीफ हो रही है।

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