सिरदर्दी का सबब : व्हाट्सएप ग्रुप

 

इंसान अपने खुराफाती दिमाग के कारण हमेशा ही दोधारी तलवार की तरह सोचता और करता है | यही वजह है कि उपयोग के साथ उसका दुरूपयोग भी होने की संभावनाएं तलाश ली जाती हैं | इन दिनों तो अपने लिए मुसीबतें गढ़ने का समय है |

तकनीक का उपयोग और फिर उसकी आदत ,धीरे धीरे कब उन तकनीकों के उपयोग के शिष्टाचार से बाहर कर देती है उसका पता भी नहीं चलता | और एक मज़ेदार बात ये भी है कि तकनीक इतनी तेज़ी से बदल रही है कि कौन कब आऊट डेटेड हो जा रहा है पता ही नहीं चलता हाँ हो जाएगा ये निश्चित है |

आज एक अकेले मोबाइल ने चिट्ठी , रेडियो ,घडी ,कैमरे ,और पेजर तक को इतिहास की बातें बना कर रख दिया | आज मोबाइल हमारे अनिवार्य से भी जरूरी साथी के रूप में अपनी जगह बना चुका है ,और इसके सहारे किसी खेल ,किसी एप्प की जो लत लगाई /लगवाई गयी है वो कितने खतरनाक स्तर तक दिलो दिमाग पर छाई हुई है इसका अंदाज़ा सिर्फ टिक टॉक और पब जी जैसे एप्स के बंद किये जाने के बाद इनके उपयोगकर्ताओं की निराशा से ही लग जाता है | 

सोशल नेट्वर्किंग (वो भी आभासीय /अंतर्जालीय ) आज इस सोशल डिस्टेंसिग के समय में तो जैसे अचानक किसी मुश्किल के हठात मिले हल की तरह से सामने आया है |  आज व्हाट्सएप ,फेसबुक, ट्विट्टर ,इंस्टाग्राम आदि जैसे सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल प्लेटफॉर्म्स से कौन नहीं जुड़ा हुआ है ? अपनी अपनी रूचि के अनुसार सब इन विकल्पों पर अपनी सहभागिता करते हैं | लेकिन सिक्के के दो पहलुओं की तरह यहां भी मामला दोतरफा ही होता है |

ट्विट्टर जहां ट्रोल किए और कराए जाने को लेकर कुख्यात होता जा रहा है तो सबके फोन में एक सबसे अनिवार्य चैट एप ,व्हाट्स एप में ग्रुप यानि समूह फीचर से |

हालांकि इन एप्स के निर्माता इंजिनियर लगातार इनमें फेरबदल करके नई नई तकनीक से इसे और अधिक उपयोगी और समुन्नत बनाते रहते हैं | व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाना ,सभी साथियों को उसमें जोड़ना , समूह के संचालन के लिए समूह का प्रशासक बनाना ,किसी एक उद्देश्य के लिए ,सूचना व् संवाद के लिए जैसे बहुत सारे विभिन्न उद्देश्यों से शुरू किये गए ये व्हाट्सएप ग्रुप जल्दी ही सुबह शाम वाले स्टिकर संदेशों से भरने लगते है और फिर दिन रात स्तरहीन चुटकुलों , भ्रामक जानकारियों आदि के सन्देश घूम घूम कर अलग अलग ग्रुप में आकर बार बार मोबाइल वाले को मुंह चिढ़ाते हैं |

अब लोग इतने सहनशील और नम्र नहीं रहे , आए दिन अब तो इस तरह की खबरें देखने पढ़ने सुनने को मिल जाती हैं की अमुक ग्रुप संचालक को समूह के एक सदस्य ने समूह से बाहर निकाले जाने को लेकर नाराजगी में उसका सर फोड़ दिया | या फिर कई बार पारिवारिक सदस्यों के साथ शुरू किये हुए ग्रुप किसी छोटी सी बात से शुरू होकर तिल का ताड़ होते हुए सारे आपसे प्रेम भाव को भी पलीता लगा देते हैं |

असल में इन व्हाट्सएप समूहों पर अक्सर होता ये है कि , कोई एक सदस्य टिप्पणी करता है ,कई बार किसी दूसरे सदस्य के लिए करता है , बीच में तीसरा सदस्य आकर उस में अपनी बात रख देता है और चौथा आकर उसे अपने तरीके से सोच और समझ लेता है | 

लगाकर आने वाले नोटिफिकेशन भी उपयोगकर्ता के लिए एक नियमित सा टेंशन एलर्ट रहता है ये ,न देखे तो आवश्यक सन्देश भी उसी नोटिफिकेशन की भीड़ में कहीं गायब हो जाएंगे और यदि देखें तो फिर क्या क्या देखें और कितना देखते रहें |

व्हाट्सएप समूह धीरे धीरे बकैती का अड्ड़ा बननाए जाने और पीछे से सरकाए हुए सारे संदेशों को आगे के समूहों में उझीलने के पवित्र उद्देश्य से निर्मित किया गया था या किसी और कारण से ये तो पता नहीं मगर विद्या माता की कसम , दुखी कर रखा है इन व्हाट्स एप समूहों ने जी |

 

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