हिन्दू , हिंदुत्व और हिन्द मात्र से भी कोसों दूर हो तुम मिस्टर गांधी

राहुल गाँधी को अब तक जान चुके सभी लोग एक स्वर में जो बात कहते हैं वो ये कि , आज राजनीति में , सड़ केजड़ीवाल और दीदी मोमता जैसे घाघ राजनीतिज्ञों के बीच अभी भी सबसे मासूम और नीरीह , कांग्रेस के राहुल गाँधी ही हैं , हमेशा से है वही हैं और दिनों दिन वे अपने आपको और भी ज्यादा प्रमाणित कर रहे हैं।

आज जयपुर में ” महँगाई हटाओ रैली ” में भाग लेने के लिए अपनी एक बहुत ही गरीब सी लाखों की गाडी में पहुँचे और अपने सम्बोधन में उन्होंने एक पारखी अर्थशास्त्री की तरह से पूरी दुनिया को -हिन्दू और हिंदुत्व -इन दो शब्दों का अर्थ वो बताया जो असल में उन्हें समझ में आया या फिर जैसा की उन्हें समझाया गया -और उसका लब्बो लुआब ये कि -हिन्दू हो गए गाँधी जी और हिंदुत्ववादी (असल में वादी प्रतिवादी बने रहने का एक पारिवारिक चरित्र ही रहा है इनका इसलिए वादी घुस ही जाता है सब जगह ) हो गए पंडित नाथूराम गोडसे।

बहुत लहालोट होकर इन्होंने पूरे मनोयोग से उपस्थित कांग्रेसी भद्रजनों के ये समझाया और ताज्जुब ये की वे यही समझे भी -अब कांग्रेस है , कुछ भी हो सकता है। लेकिन एक मिनट -विषय इस एकत्रीकरण करण का महँगाई था न -और संदेश में -गाँधी गोडसे के बीच आप रेस कराना चाह रहे हैं।

मिस्टर गाँधी -यहाँ सिर्फ दो दिक्क्त है , ज्यादा बड़ी भी नहीं है कि आपको उससे बचने के लिए छुट्टी पर -बतौर हिन्दू किसी तीर्थस्थल /धर्मस्थल के कल्याणार्थ ही सही दर्शनार्थ ही सही जाना पड़ जाए -वैसे मिस्टर गाँधी आप तो शायद विदेश में छुट्टियाँ मनाने वाले हिन्दू हैं एकदम क्लासी वाले हिन्दू। जिसे आज तक किसी हिन्दू पर्व त्यौहार मनाते तो छोड़िए उसकी बधाई देते लेते नहीं देखा गया , कभी राखी ,भैया दूज ,होली न सही तिलक चन्दन , सुनिए , आपसे नहीं हो पाएगा। असल में पूर्व प्यारे श्री मोहन जी भी गोल्ड मैडल वाले थे इकोनॉमिक्स में आपने उन्हें पोलिटिकल साइंस का मॉनिटर बना दिया वो भी म्यूट , आप के खुद के सिलेबस में , और कुछ हो न हो पोलिटिकल साईस -आउट ऑफ़ सिलेबस है , तो

तो फिर क्या जरूरत है , हिन्दू हूँ -हिंदुत्ववादी -नहीं हूँ , मतलब कुछ भी -कभी सामने बैठ के बोलिए ये सब किसी के -दो मिनट में -आपका हिंदुत्व ही पिघल के पानी पानी हो लेगा युवराज गाँधी जी। जागिये थोड़ा , और होश में आइये , नकारात्मकता कभी भी सृजन का पर्याय नहीं हो सकती है कभी भी नहीं , ऐसे समय में जब , प्रधानमंत्री देश के बहुसंख्यक समाज यानी हिन्दू -और वो कम से कम -आपके वाले मंच और तम्बू के नीचे बने रहने भर वाला हिन्दू नहीं है , आप नहीं समझेंगे आपसे होगा ही नहीं , उस हिन्दू समाज को उसके आदि देव महादेव की इतिहास से भी पहले बनी और जन्मी नगरी काशी को उसके दिव्य रूप में सौंपने जैसा अद्भुत अकल्पनीय क्षण देने जा रहे हैं ,ऐसे समय में

ये हिन्दू और हिंदुत्व -गाँधी और गोडसे के बीच – क्या राहुल गाँधी सच में ही आज देश में इन दो विचारधाराओं के बीच का निर्णय जैसा कुछ देखना परखना चाह रहे है ??

महंगाई हटाओ रैली में -यही , बस यही बच गया था बोलने कहने बताने को -सत्याग्रह से सत्ताग्रह -अच्छा जी , और ये कौन कह रहा है जो देश पर लगभग 60 साल तक खुद सत्ताग्रह में ही रहा हो , महँगाई -है न , जैसे हमने पहले 100 रूपए किलो टमाटर प्याज नहीं खरीदे खाए ,जैसे पहले तो खजाने भरे पड़े थे और अब अचानक ही , जब बोलने कहने को कुछ नहीं बचता तो फिर यही होता है।

बस यूँ ही , इसी तरह कुछ भी बेसिरपैर का विवादित होने की पूरी संभावना वाला बोल कह कर राजनीति को यूँ कृतार्थ करते रहिये , ये भी असल में कोई कम बड़ा उपकार नहीं है। वैसे अब तक कितनी बार कोर्ट में माफ़ी माँग चुके हैं आप लेकिन —–मन नहीं भरता है , है न

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