ममता से लेकर चन्नी तक : मोदी विरोध में मुख्यमंत्रियों द्वारा की जा रही बदगुमानी/दुर्व्यवहार -अनुचित परिपाटी 

अब से कुछ ही महीनों पहले प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी की और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक आधिकारिक मुलाकात चर्चा का विषय बन गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ममता द्वारा प्रधानमन्त्री के प्रति किया गया निहायत ही उपेक्षित और गैरजिम्मेदाराना बयान की निंदा पूरे देश और सभी राजनैतिक दलों ने की थी।

इस बैठक में मुख्यमंत्री बनर्जी अपनी मांग और सहायता का पुलंदा , प्रधानमंत्री की उपश्तिथि में अधिकारियों को सौंप कर बिना किसी विचार विमर्श के यह कर कर निकल गईं कि उनका पहले से कोई अन्य कार्यक्रम तय है।

ठीक इसी तरह अभी कुछ दिन पहले ऐसे ही प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा कोलकाता में किए जा रहे कैंसर संस्थान के नवनिर्मित परिसर के उदघाटन कार्यक्रम के दौरान जानबूझ कर ये कहना कि , राज्य सरकार उनकी अगुआई में इसका उदघाटन पहले ही कर चुकी है भी सरासर अमर्यादित आचरण का प्रदर्शन किया गया।

इत्तेफाक देखिए कि , जाने कितने ही निजी आक्षेपों , अपमानजनक सम्बोधनों , साजिशों के बावजूद भी अत्यंत ही सरल , मृदुल और सहशीलता का परिचय देने के बावजूद पिछले 7 वर्षों मोदी , भाजपा , सरकार और पूरे देश पर “असहिष्णुता ” का ठप्पा लगाने के लिए काँगी , वामी , धर्मद्रोही , राष्ट्रद्रोही ,सभी एक होकर तरह तरह का स्वांग रच रहे हैं।

मूल बात ये है कि ब्रितानी सरकार की गुडबुक्स में रहने वाली कांग्रेस इ भारतीय राजनीति में एक ही परम्परा को स्थापित किया और वो था /है गाँधी उपनाम को संतुष्ट किए रहना और सिर्फ और सिर्फ उनके प्रति ही सारी निष्ठा प्रतिबद्धता जताए रखना। प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल में कांग्रेस अध्यक्षा मैडम को ही सारी जानकारी सौंप कर निर्देश लेते रहे और अब मुख्यमंत्री चन्नी उसी परम्परा को बढ़ाते हुए कांग्रेस महामंत्री मैडम प्रियंका को सारी ब्रीफिंग कर रहे हैं।

ऐसे में हिन्दुस्तान की अंतिम पंक्ति से निकल कर एक साधारण व्यक्ति , प्रखर सनातनी और प्रतिबद्ध राष्ट्रवादी भी , यदि इतने बड़े जनसमूह का लोकप्रिय जननायक बन जाता है और यही बात राजनीति को पुश्तैनी कारोबार बना और समझ लेने वालों को नागवार गुजर रही है।

केंद्रीय सत्ता की विपक्षी पार्टियों की सरकारें और उनके मुखिया जिस तरह से प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदस्थ व्यक्ति की गरिमा और यहाँ तक कि उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किए जाने की हद तक गिर कर राज्य संघ शक्ति संतुलन व्यवस्था में एक गलत परिपाटी को जन्म दे रहे हैं। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए

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