Bollywood का इस्लामिक एजेंडा

बॉलीवुड की चर्चित और अपने बेबाक बयानों से हिंदी सिनेमा में इन दिनों चल रहे सारे कुकर्मों को बेख़ौफ़ होकर सार्वजनिक कर सबके सामने लाने वाली कंगना रनौत ने एक एक करके जैसा और जो जो सच सबके सामने लाना शुरू किया है उसी सच की कड़ी में एक ये भी कड़वा सत्य है कि एक तयशुदा इस्लामिक एजेंडे के तहत न सलमान ,शाहरुख ,आमिर और सैफ अली खान जैसे अभिनेताओं ने गैर मुस्लिम सिने कलाकारों को न सिर्फ प्रताड़ित और शोषित किया है बल्कि उनका पूरा करियर तक तबाह करने में लगे रहे थे /हुए हैं |

हाल ही में हुई सुशांत सिंह राजपूत की मौत के सन्दर्भ में भी ये बात बार बार निकल कर सामने आई है कि सलमान खान जैसा अभिनेता बड़ी फैन फ़ॉलोविंग और बॉलीवुड में अच्छा खासा रसूख रखने वाला व्यक्ति भी न सिर्फ इस मामले में बल्कि ऐसे अनेकों मामंलों में ये सब करता रहा है |

बॉलीवुड को बारीकी से देखने परखने वाले लोग बताते हैं की , 1913 में जब दादा साहब फाल्के ने भारत की पहली पिक्चर बनाई थी तो उसका नाम था राजा हरिश्चंद्र ,और ये तो बस शुरआत थी इसके बाद आने वाले दिनों लगातार धार्मिक ,सामजिक सांस्कृतिक आत्मा को छूने वाले सिनेमा का ही निर्माण होता रहा | इन फिल्मों में आम लोगों को उनके ईष्ट के धर्म ,दर्शन ,ज्ञान को खूबसूरती के साथ सबके सामने लाया जाता रहा |

बॉलीवुड में निवेश और लाभ का अर्थ शास्त्र इतना बड़ा हो गया था कि अब बॉलीवुड के बीहड़ में पनपते मवाली ,स्मगलर , डॉन आदि की नज़र बॉलीवुड में पैसे लगाकर ब्लैक को व्हाईट मनी बनाने का गोल्डन कोड मिल चुका था |और वो सब के सब अपनी काली कमाई को चित्रपट सिनेमा के ईस्टमैन कलर में रंग कर सफ़ेद करने का गुर सीखने लगे |

अरुण गावली , हाजी मस्तान ,दाऊद इब्राहिम , और टाइगर मेमन जैसे अपराध की दुनिया के अगुआ सबने न सिर्फ फिल्म निर्माण में ,बल्कि इन फिल्मों के काम दिलाने के बहाने महिलाओं के शोषण और हिन्दू धर्म ,प्रतीकों ,सस्थानों और हिन्दुओं की भी छवि लगातार गिराने और एक सोची समझी साजिश के तहत ऐसा किया |

संवाद लेखन से लेकर , चरित्र चित्रण तक, गीत संगीत ,कलाकारों विषयों तक के चयन में जानबूझ कर बहुत शातिराना तरीके से हिन्दू धर्म और प्रतीकों को कमतर करके आंकना ,उनकी छवि को उपहास का बिम्ब बना कर विवाद पैदा करना , जानबूझ कर अल्लाह मौला वाली कव्वालियों और सूफी संगीत को घुसाना | पंडित को धूर्त और मौलवी पादरी को सहृदय दिखाना , सारे आडंबर ,सारी धूर्तता , शोषण करने वाला समाज हमेशा ही हिन्दू समाज को दिखाया जाना आदि ऐसे सारे काम बड़े ही शातिर तरीके से किया जाने लगा |

अपराध की दुनिया के लोगों की नज़र हिंदी सिनेमा पर पड़ते ही ये इस्लामिक एजेंडा पूरी तरह अपनी परवान चढ़ गया | अंडर वर्ल्ड का पैसा बहुत सालों तक हिंदी सिनेमा में लगाने वाले निर्देशक भारत भाई शाह का नाम बार बार सामने आता रहा | अंडरवर्ल्ड के सीधे दखल का दोहरा परिणाम रहा | आमिर शाहरुख सलमान सैफ सरीखे अभिनेता जो अब तक बहुत बड़ी सफलता नहीं पा रहे थे हिंदी सिनेमा में ,इन्हें और इनकी फिल्मों में खूब पैसा लगाया जाने लगा , सिनेमा थियेटर समूहों को धमका कर इनकी फिल्मे दिखाने के लिए विवश किया गया | सास्कृतिक एकता के नाम पर दुश्मन देश पाकिस्तान से तमाम कलाकारों , अभिनेताओं ,संगीतकारों ,गायकों आदि को भी बुलवा कर यहाँ कमाने का मौक़ा दिया जाता रहा

इतना ही नहीं ,अरब और खाड़ी देशों में हर साल पुरस्कार वितरण समारोह और विभिन्न शोज़ के माध्यम से इन ख़ास अभिनेताओं और इनकी गैंग को पूरी दुनिया में प्रसिद्ध करने की एक सुनियोजित साजिश चलती रही | एक तरफ इन्होने अपने मुस्लिम एजेंडे पर चलते हुए फिल्मों का इस्लामीकरण करना जारी रखा तो वहीँ दूसरी तरफ गैर मुस्लिमों को बार बार धमकी दे कर डराना , और उनकी ह्त्या तक कर देने जैसे काम भी किये जाते रहे | टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की ह्त्या संगीतकार नदीम द्वारा , दिव्या भारती की विवादास्पद मौत और अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत |

इनके अतिरिक्त गायक सोनू निगम , अभिजीत , अरिजित सिंह जैसे अनगिनत प्रतिभावान कलाकारों को मुस्लिम एजेंडे के षड्यंत्र के तहत उनके करियर को बर्बाद करने की सारी कोशिशें की गई और जो अब भी जारी हैं | निजी जीवन में इन तमाम मुस्लिम अभिनेताओं ने जानबूझ कर गैर हिन्दू महिलाओं से विवाह ,वो भी कई कई विवाह ,करके अपने उसी मुस्लिम एजेंडे को और परवान चढ़ाया |

फिल्मो में जानबूझ कर हिन्दू चरित्र का किरदार निभाते ये लोग मौक़ा पाते ही हिन्दू धर्म और प्रतीकों का उपहास उड़ा कर उन्हें अपमानित करने का कोई अवसर नहीं चूकते | इनका दोगलापन देखिये तो समझ में आता है कि , गैर मुस्लिम अभिनेताओं से मुस्लिम किरदार निभवाना और खुद मुस्लिम होकर हिन्दू नाम और चरित्र से अपनी छवि को चमकाए रखना यही इनका वो ढका छिपा छद्म निरपेक्ष रवैया तब बाहर आ जाता है जब आमिर खान , शबाना आज़मी , नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गज भी समय समय पर एक पल में ही भारतीय से मुसलमान हो जाते हैं और उन्हीं ज़हरीले बोलों को अपने अपने तरीके से सबके सामने फैलाते हैं |

सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात ये है कि इनमे से किसी भी अभिनेता ,निर्देशक ,संगीतकार ,गीतकार आदि कि हिम्मत कभी नहीं हुई कि वे मुस्लिम मज़हब के कुरीतियों ,कमियों , कट्टरवादी सोच आदि पर कुछ भी लिख कह और दिखा सकें | आखिर कब तक भारत और भारतीय अपने ही घर में अपना अपमान होता हुआ देखेंगे और न सिर्फ देखेंगे बल्कि उसके बदले अपने खून पसीने की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन धर्म और देश समाज के दुश्मनों की तिजोरियां भरने के लिए लगाएंगे | सोचना सबको है। …..

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