सरकार की प्रतिबद्धता और प्रस्तावित कानून

 

jhajikahin

आरक्षण  की नीति लागू करने के विरूद्ध हुए जनांदोलन के काफी समय बाद एक बार फिर किसी प्रस्तावित कानून के मसौदे को विषय बना कर शुरू हुआ आंदोलन देखते ही देखते देश व्यापी आंदोलन बन गया | यह आंदोलन था इंडिया  अगेंस्ट करप्शन नामक संगठन का  जिसने नागरिक आंदोलन के माध्यम से देश भर में जनलोपाल की नियुक्ति की माँग बहुत  ही पुरज़ोर और कारगर तरीके से उठाई थी | तत्कालीन सैरकार द्वारा प्रस्तावित लोकपाल विधेयक में कुछ संशोधन सुझाव पर विचार करने की मांग के साथ ये आंदोलन बहुत प्रभावकारी हुआ  इतना कि बाद में इसके अगुआ सक्रीय राजनीति  कुछ प्रमुख लोगों में शुमार हुए |
ये परिवर्तन का दौर है ,विशेषकर मोबाइल और इंटरनेट ने संवाद और सम्प्रेषण  की व्यापकता को असीमित विस्तार दे दिया है | अन्ना  आंदोलन वो पहला जनसंघर्ष था जब इसमें सरकार द्वारा प्रस्तावित क़ानून के मसौदे को लोने न न सिर्फ पढ़ा  समझा बल्कि उसकी खामियों को उजागर किया ५ और उन्हें दूर करने के लिए विकल्प भी तलाश कर उन्हें सामने रखा  वर्तमान में न तो ये मुहिम प्रभावशाली रहे न ही इससे जुड़े लोगों ने इस लड़ाई को आगे बढ़ाया  किंतु संसद के संघर्ष को सड़क पर खींच लाने की प्रवृत्ति से अब अवाम पूरी तरह से वाकिफ हो चुकी थी  वर्तमान केंद्र सरकार अपने पहले कार्यकाल में सदन की ऊपरी सभा में बहुमत न हो पाने के बावजूद बहुत सारे नए कानूनों व प्रस्तावों पर काम करती रही  किंतु वर्ष २०१९ के आम चुनावों में पुत्र भारी बहुमत से सन्ता में आने के बाद ऊपरी सदन राज्यसभा में भी किसी विधेयक को रोकने की विपक्ष की अपेक्षित संख्या कम हो गयी |
जैसा की अंदेशा था की सरकार दोबारा सत्ता में आई तो अजेंडे पर,वर्षों से लंबित सभी विधेयकों को पटल पर रखेगी | पिछले कार्यकाल में तीन तलाक,आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे गैर पारंपिक विषयों पर विधेयक बनाकर अपनी मंशा को पहले ही स्पष्ट कर चुकी इस सरकार ने अपनी इस बार की शुरुआत जम्मू व् कश्मीर राज्य से सम्बंधित विशेष उपबंध धारा ३७० को समाप्त करके की | इसके बाद पड़ोस के देशो के धार्मिक अल्पसंख्यक जिन्हें सालों से शरणर्थी की तरह जीवन गुजारना पड़  रहा था उन्हें विधिक रूप से नागरिकता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय नागरिकता कानून वर्ष 1955 में सातवां (छ: संशोधन इससे पूर्व की सरकारों ने किया था ) संसोधन कर नागरिकता संसोधन कानून 2019  को दोनों सदनों से पारित करवा कर लागू भी कर दिया |
इस सन्दर्भ में एक और विचारणीय बिंदु रहा न्यायपालिका का रुख व आदेशों ने भी केंद्रीय सरकार के निर्णयों को संविधान के प्रतिकूल नहीं माना | हाल ही में दायर एक जनहित याचिका में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके पूछा है की जनसंख्या विस्फोट की इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार किन उपायों नीतियों पर कार्य कर रही है | केंद्र सरकार जिसने पहले ही लोक कल्याण हेतु प्रस्तावित अधिनियमों जैसे समाज नागरिक संहिता , जनसंख्या नियंत्रण कानून भविष्य में लाए जाने का मन बना लिया है माँननीय न्यायपालिका के निर्देशों के अनुपालन में ज़रा भी विलम्ब नहीं करेगी |

इनके अलावा , धर्मस्थलों व धार्मिक संस्थानों पर नियंत्रण/प्रबंधन विषयक विधेयक , भूसंपत्ति व भवन निर्माण कानून , अखियल भारतीय न्यायिक सेवा आयोग की स्थापना विषयक कानून राज्यसभा अधिकार क्षेत्र सीमितता कानून , स्वर्ण/आभूषण भंडारण सीमितता कानून ,अखिल भारतीय शिक्षा नीति नियामक कानून आदि वो प्रमुख विधेयक हैं जो सरकार द्वारा प्रस्तावित एजेंडे में सर्वोपरि हैं | इन सबके अलावा अन्य बहुत से क्षेत्रों व विषयों पर नए कानून/संशोधन के अतिरिक्त समय के साथ पुराने पद चुके व वर्तमान में औचित्यहीन हो चुके कानूनों के निरसन /संधोशन व परिमार्जन का विचार भी सरकार के प्रस्तावित कार्यसूची में है |

एक अहम प्रश्न जो बार बार इस सन्दर्भ में सामने आ रहा है वो ये की इन कानूनों की संविधानिकता जांचते हुए भी क्या ये कानून कसौटी पर खरा उतर पाएगा ? कानून और  नज़रिया तो भविष्य में पता चलेगा और न्यायपालिका का नज़रिया तो भविष्य में पता चलेगा और ये भिन्न भिन्न विषयों/मामलों पर भिन्न ही होगा किन्तु वर्तमान में जिस तरह से केंद्र सर्कार एक फसलों/प्रस्तावों/नीतियों आदि पर न्यायपालिका ने अपनी मंशा सपष्ट की है उससे तो ये सरकार के लिए काम से काम नकारात्मक तो नहीं कही जा सकती है | उसपर वर्षों से लंबित रामजन्म भूमि विवाद को भी न्यायपालिका ने अपने निर्णय से वर्तमान केंद्र सरकार के मनोनुकूल ही कर दिया |
सारांशतः यह कहा जा सकता है आने वाले चार वर्षों में सरकार ,संसद सत्रों में लोक कल्याण ,विधि ,शिक्षा ,जनसँख्या आदि से जुड़े अनेक विषयों पर प्रस्तावित/विचारित विधेयकों को प्रस्तुत कर कानून बनाने का भरसक प्रयास करेगी | सरकार को चाहिए की जन सचेतता के लिए इन कानूनों को सरल भाषा में, प्रचार प्रसार द्वारा आम लोगों के समक्ष भी रखे ताकि जनभागीदारी बढ़ाने के साथ साथ लोग मानसिक रूप भी इसके लिए तैयार रहें |

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