पढ़ेगा इण्डिया तो बढ़ेगा इण्डिया : नई शिक्षा नीति

मोदी सरकार हर क्षेत्र में ऐसे ऐसे क्रांतिकारी सुधारों पर लगातार इनमें सुधार का जो काम कर रही है वो अपरिहार्य और अद्वितीय है | नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिल गयी है | और ये मंजूरी सिर्फ एक नीति को नहीं मिली है ये आग्रह हुआ है शिक्षाविदों से कि अब देश सिर्फ पढ़ेगा नहीं ,वो सीखेगा , समझेगा वो सब जिसकी जरूरत उसे आगे अपने जिंदगी के छोटे बड़े ख़्वाब पूरे करने में ही काम आएंगे |

ये देश जो गुरुकुल में रह कर शिक्षित और सुसंस्कृत होता था उसे जबरन अंग्रेजियत से पीछे सरका कर खड़ा किए जाने की दशकों तक लगातार चलने वाली कोशिशों ने आखिरकार देश की भाषा और संस्कृति तक को एक बाज़ार भर में बदल कर रख दिया | पिछले कुछ दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में जिस सबसे मूलभूत जरूरत को हमेशा ही उपेक्षित रखा गया वो था रोजगारपरक शिक्षा या कौशल आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था | लगातार एक ही तरह की शिक्षा व्यवस्था में तेज़ी से बदलते , हुए बौद्धिक  व तकनीकी समझ की कमी , इंटरनेट की दुनिया के कारण वैश्विक शैक्षणिक व्यवस्था के बीच स्व मूल्यांकन जैसे आने कारकों ने ये जरूरत महसूस करवा दी थी |

सरकार जिसने अपने मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर पूर्णरूपेण शिक्षा मंत्रालय ही नहीं किया बल्कि आने वाले अगले पंद्रह वर्षों में देश को  सम्पूर्ण साक्षर और उत्पादकता आधारित शिक्षा व्यवस्था देने के लिए पूरीऔर  तरह कटिबद्ध दीर्घकालिक नीति पेश कर दी है | वर्तमान शिक्षा पद्धति पिछले 22 वषों से चली आ रही थी तथा वर्तमान परिवर्तनों के अनुरूप भारतीय शिक्षा नीति में बदलाव अपेक्षित था |

मध्य विधालयी शिक्षा ही यह तय कर देगी कि बच्चे उसके आगे अपने भविष्य में किसी कौशल से रोजगार सुनिश्चित करने के लिए आगे की कक्षाओं की पढाई एक अमुक दिशा में करनी होगी | उच्च और उच्चतर स्तर पर कौशल को मांज कर उसे सटीक और दक्ष करके रोजगार और उत्पादन की इकाई के साथ एकाकार कर देने का फैसला भी बहुत ही युगांतकारी साबित होगा | प्राथमिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में ग्रहण किये जाने का निर्णय भी स्वागतयोग्य है |

उच्च शिक्षाओं में लगा हुआ समय श्रम और ज्ञान अब निरर्थक नहीं जाएगा जो जहां तक भी पढ़ सकेगा उसे उसी के अनुरूप प्रमाणपत्र दे दिया जाएगा | रोजगारमूलक शिक्षा पद्धति को अपनाए रखने की सोच के कारण ही लगभग 156 गैर परंपरागत विषयों को पहली बार ही मुख्य शिक्षा की धारा में लाया गया  है |

नियंत्रक /नियामक संस्थाओं को एक साथ लाकर अधिक पारदर्शिता और रफ़्तार देने के की कोशिश आने वाले समय में कितनी नई चुनौतियां और नए बदलाव शिक्षा व्यवस्था में लाएगी ये देखने वाली बात होगी |

लेकिन इतने सबके बावजूद  भी कुछ अपेक्षित निर्णय मसलन पूरे देश में निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा जारी खुल्लम खुल्ला लूट पर रोक , सरकारी शिक्षण संस्थानों का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण ,(कम से कम निजी संस्थान से रत्ती भर भी कम नहीं ), पूरे देश भर में एक ही कोर्स और एक ही किताबों से पढाई तथा दो वर्ष का अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण ताकि शैक्षणिक संस्थानों से निकल कर समाज के बीच जाने वाला एक सम्पूर्ण नागरिक बन सके |

अब सबसे जरूरी बात ये है कि आने वाले समय में इन शिक्षा सुधारों पर अमल किया जाना सुनिश्चित करना शिक्षा नीति को लाए जाए जितना ही अधिक महत्पूर्ण है |

ताज़ा पोस्ट

एक देश एक कानून से ही बंद होगा ये सब तमाशा

थोड़े थोड़े दिनों के अंतराल पर , जानबूझकर किसी भी बात बेबात को जबरन तूल देकर मुद्दा बनाना और फिर उसकी आड़ में देश...

भाजपा को साम्प्रदायिक दिखाते दिखाते खुद ही कट्टरपंथी हो गया पूरा विपक्ष

यही होता है जब झूठ पर तरह तरह का लेप चढ़ाकर उसे सच बताने /दिखाने और साबित करने की कोशिश की जाती है और...

मुस्लिमों का मसीहा बनने के लिए क्यों जरूरी है :हिन्दुओं के विरूद्ध ज़हर उगलना

सड़क पर चलता हुआ एक अदना सा कोई भी ; एक पुलिस अधिकारी को उसका चालान किए जाने को लेकर सार्वजनिक रूप से धमकाते...

ममता से लेकर चन्नी तक : मोदी विरोध में मुख्यमंत्रियों द्वारा की जा रही बदगुमानी/दुर्व्यवहार -अनुचित परिपाटी 

अब से कुछ ही महीनों पहले प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी की और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक आधिकारिक मुलाकात चर्चा का...

20 करोड़ हैं :हम भी लड़ेंगे : फिर छलका नसीरुद्दीन शाह का मुग़ल प्रेम

फिल्म जगत में पिछले कई दशकों से सक्रिय और अपने मज़हबी मुगलाई एजेंडे को चुपचाप चलाने वाले तमाम लोग इन दिनों नकली बौद्धकता और...

यह भी पसंद आयेंगे आपको -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

ई-मेल के जरिये जुड़िये हमसे