खर्च किए गए 47 हज़ार 634 करोड़ रूपए :नए अस्पताल -0 ,ऑक्सीजन प्लांट -0 -हम दिल्ली के मालिक हैं 

खर्च किए गए 47 हज़ार 634 करोड़ रूपए :नए अस्पताल -0 ,ऑक्सीजन प्लांट -0 -हम दिल्ली के मालिक हैं

नई तरह की राजनीति करने , नहीं नहीं माफ़ करियेगा , गंदी हो चुकी राजनीति को बदलने के लिए आए कुछ लोग जो जनता को “जनलोकपाल ” बना कर सब कुछ स्वच्छ , साफ़ और स्पष्ट करने के लिए ख़ुद राजनीति में उतरते हैं और जल्दी ही धूर्तता , मक्कारी , भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के खेल में इतने माहिर हो जाते हैं कि सत्ता की मलाई चाटना ही सिर्फ और एकमात्र अकेला उद्देश्य बच जाता है और वे इसी पर चलने लगते हैं।

पिछले पाँच छह वर्षों में देश और विदेश तक में , जहाँ तक हो सके अपनी अभूतपूर्व उपलब्धियों और नई योजनाओं के नाम पर अपना चेहरा चमकाने दिखाने में करोड़ों रूपए फूँक कर बताते दिखाते हैं कि किस तरह से दिल्ली की नई सरकार ने राजधानी की चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन करने के लिए कई नायाब प्रयोग किए , और न सिर्फ किए बल्कि खुद ही ये प्रमाणपत्र भी दे देते हैं कि आज तक न तो ऐसा कभी सोचा गया न ही कभी हुआ है।  देश विदेश से प्रोत्साहान और अनुदान बटोर कर वाहवाही पाती रहती है सरकार।

फिर आता है महामारी का समय और पिछले पाँच वर्षों में चिकित्सा व्यवस्था पर लगभग 48 हज़ार करोड़ रूपए खर्च किए जाने के बावजूद ये पता चलता है कि राजधानी दिल्ली वालों के लिए सरकार ने न तो एक भी नया अस्पताल बनवाया और न ही एक भी ऑक्सीजन प्लांट , नतीजा दिल्ली के लोग दवा , इलाज और साँस के चंद कतरे के लिए तरसने लगते हैं , मरते जाते हैं।

सरकार को अच्छी तरह पता होता है कि उसने क्या कितना और कहाँ ठीक या गड़बड़ी की है। फिर शुरू हो जाता है वही पुराना राग -मोदी , भाजपा और केंद्र सरकार को कोसने का काम , उन पर आरोप लगाने का काम ,उनसे दवाई , चिकित्सा उपकरण और ऑक्सीजन तक की माँग और न मिलने पर रोज़ रोज़ टेलीविजन पर आकर अपनी मजबूरी जाहिर करने ,रोने धोने का सिलसिला जो निर्बाध निरंतर अब भी चल रहा है।

अब लोग खुद अनुमान लगाएं कि , ईमानदारी , शुचिता की बात करके सत्ता तक पहुँच बना लेने वाले ये लोग उनसे भी ज्यादा खतरनाक और धूर्त निकले जो खुलेआम ये करके राजनीति में पहले से ही बदनाम रहे थे।  लोग कुछ नहीं भूलते मगर याद भी नहीं रखते हैं और इस पर भी लीपापोती हो ही जाएगी , लेकिन अब जब अगली बार दिल्ली सरकार बजट में हज़ारों करोड़ रूपए का प्रावधान रखे तो उनसे पूछा जाना चाहिए कि -उनका पैसा कहाँ ,कैसे खर्च किया जाएगा ????

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