विदेशी वैक्सीन का बाज़ार बनाने के लिए वैश्विक मीडिया कर रहा भारत को बदनाम

कल्पना करिये -एक तरफ भारत कोरोना की इस दूसरी और अधिक प्रलयकारी लहर से जूझ रहा था , शमशान और धरती जलती चिताओं से तप रही थी और आसमान लोगों की दारुण चीख पुकार से आहत , लेकिन ऐसे में भी कुछ लोग थे जिन्होंने अमानवीयता और हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।

ये वो लोग जिन्होंने भारत में जल्दी चिताओं , मौतों की तस्वीरों और समाचार पर भी व्यापार करने का घिनौना षड्यंत्र रचा और सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे भारत के विरोधियों /शत्रुओं तक को इसमें शामिल कर लिया। सोच कर देखिये कि विदेशी मीडिया ने भारत को बदनाम करने के लिए भारत की जलती चिताओं की जिन तस्वीरों को दिखाया उन्हें वहाँ तक पहुँचाने वालों को इस एवज में हजारों डॉलर और पाउण्ड का भुगतान किया गया। उबकाई आ जाती है , वितृष्णा हो जाती है ये ख्याल भर मन में आते ही।

अब धीरे धीरे ये राज़ भी खुलता जा रहा है कि जो पश्चिमी जगत और बाकी के अन्य देश कोरोना की पहली लहर में ही बुरी तरह से त्रस्त पस्त हो चुके थे वो सभी भारत जैसे विकासशील और तीसरी दुनिया के देश भारत का इन सबसे उबर जाना , न सिर्फ खुद बाहर आ जाना बल्कि , पूरी दुनिया के लिए दवाई , चिकित्सा सहायता करके संकटमोचन बन जाना और सबसे अधिक इतने कम समय में ही एक नहीं बल्कि दो दो -वैक्सीन की खोज कर लेना -आदि भारत की बढ़ती ताकत और कद को देख कर बुरी तरह से खीज उठा और उसे ये अनुमान हो चला था कि अब वो दिन लद गए जब भारत ऐसी असाधारण परिस्थतियों में भी किसी दूसरे देश पर निर्भर रहेगा और यहीं से शुरू हुई ये सारी साजिश और इसे अंजाम तक पँहुचने का काम।

भारत की विशालतम जनसंख्या , चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति और सबसे अधिक देश के अंदर ही देश को तोड़ने वाले गिद्ध से भी बदतर राजनेताओं के बावजूद भारत जैसे तैसे इन सबसे उबरने की कोशिश कर रहा था और पश्चिमी देशों के कुछ इन जैसे ही जो ऐसे ही अवसर पर भारत को अपने उत्पादोंका बाज़ार बनाने देने के मौके में रहते हैं उन्होंने इसे नया नज़रिया देना शुरू किया।

इण्डियन स्ट्रेन , बेकाबू कोरोना , मौतों के आंकड़ों , जलती चिताओं , वैक्सीन पर पहले सवाल उठा कर फिर वैक्सीन की कमी का हल्ला मचा कर ये सब सिर्फ और सिर्फ भारत में अपना व्यापार करने , उसे भुनाने के लिए किया जा रहा था। देश में रहने वाली एक लॉबी भी इसके लिए सरकार पर दबाव बना रही थी।

और इसका असर अब दिखने भी लगा और सबको समझ भी आ रहा है।

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