ये भवानी को सिर्फ पूजने का वक्त नहीं , ये स्वयं भवानी दुर्गा काली हो जाने का समय है

 

एक बेटी के पिता के रूप में आज कुछ वो बातें साझा कर रहा हूँ आप सबसे और खासकर मेरी बेटियों जैसे देश और दुनिया की तमाम बेटियों से भी | महानगर दिल्ली में रहते हुए , और शायद कहीं न कहीं मन में उसकी एक अनजानी सी चिंता से ग्रस्त न होने देने की भावना या डर ही वो वजह थी जो मैं पुत्री के पिता के दायित्व बोध से भयभीत था |

मेरी हमसफ़र , मेरी सहकर्मी भी हैं और ऐसे तमाम मौकों पर वे मुझसे बेहतर निर्णय लेती हैं , सो हम दोनों अब एक बिटिया के माँ बाप हैं | पेशागत रूप से भी मैं अदालत से सम्बंधित होने के कारण समाज में बढ़ते अपराध और विशेषकर बेटियों और बच्चों के प्रति समाज की बढ़ती क्रूरता से रोज़ आमने सामने होता हूँ | लेकिन जब माँ शेरनी रूप रहे तो बेटी दुर्गा रूप हो ही जाती है |

सिर्फ तो टूक शब्दों में कहूँ तो ,बेटियों , ये नवरात्रि में जो माँ के नौ रूप हैं न ये तो बस माँ की एक छोटी सी लीला है अन्यथा दुनिया के बनने से लेकर अब तक जब भी माँ को सृजक से सीधा संहारक रूप में जाना पड़ा है माँ ने गौरी से काली होने में क्षण भर का भी विलम्ब नहीं किया है |

लाडो , ये दुनिया तुम्हारी ताकत , तुम्हारी शक्ति , तुम्हारी दृढ़ इच्छा शक्ति को भूल रही है ????नवरात्रि में नौ दिन भी ? क्या सच में नौ दिन भी ,दुनिया ये गारंटी दे सकती है की इन नौ दिनों में बेटियों की तरफ कोई देखना तो दूर सोचेगा भी नहीं ?

नहीं ऐसा कहीं नहीं होगा ? क्यूंकि ऐसा होने नहीं दिया जाएगा ? ये युगों से जमा हुआ हो कलंक है जो इतनी जल्दी नहीं मिटेगा | इसलिए ,लड़कियों , ये जो नौ दिनों तक दुनिया तुम्हारे आगे नतमस्तक रहती है न , इसे एहसास दिलाओ कि इसे ऐसे ही रहना चाहिए , हर वक्त कृतघ्न और एहसान मंद तुम्हारे प्रति |

बेटियों , माँ भवानी दुर्गा के उग्र रूप लेकर माँ चंडिका के काली रूप तक ,अपने रूद्र अवतार को धारण किये रहो | सृष्टि में ईश्वर ने किसी भी अधिक मजबूत या कमज़ोर नहीं बनाया है ,ये दुनिया ऐसे रची ही नहीं गई थी | तो दुनिया के रचयिताओं में हिस्सेदारी निभाने वाली माँओं को ये अधिकार किसी से भी माँगने कहने पूछने बताने की जरूरत नहीं कि उन्हें अपनी रची इस दुनिया में खुद को कैसे रखना है ?

नारी अपने आप में शक्ति का रूप है और अगर उसे सारे देव शक्तियों ने अपने तेज को एकत्र कर दुर्गा रूप दिया हो , अस्त्र शस्त्र , निर्भयता , गुणों से आशीषा हो तो फिर उसका लेशमात्र भी क्षय कोई नहीं कर सकता ,कभी भी नहीं | बेटियों ये तुम्हारे दुर्गा ,काली ,भवानी ,चंडी होने का समय है और यही समय है |

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